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कोरोना का खतरा टला नहीं है

Updated at : 23 Nov 2020 2:29 AM (IST)
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कोरोना का खतरा टला नहीं है

कोरोना का खतरा टला नहीं है

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आशुतोष चतुर्वेदी

प्रधान संपादक

प्रभात खबर

ई राज्यों में कोरोना का संक्रमण फिर से पांव पसार रहा है. देश में कोरोना के कारण सवा लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं और संक्रमित लोगों की संख्या 91 लाख के पार कर गयी है. दीपावली के दौरान कोरोना की अनदेखी भारी पड़ती नजर आ रही है. छठ के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की अनदेखी संकट और बढ़ा सकती है.

अब शादियों का मौसम भी आ रहा है. इस दौरान यदि हमने कोरोना की अनदेखी की, तो यह हम सब पर भारी पड़ सकती है. कई राज्यों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिसके बाद कई वहां की सरकारों को पाबंदी जैसे कड़े कदम उठाने पड़े हैं. कोरोना के बढ़ते संक्रमण की रोकथाम के लिए गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा ने पाबंदी लगाने का फैसला किया है.

गुजरात में कोरोना के बढ़ते मामले को देख राज्य सरकार ने अहमदाबाद में 20 नवंबर से रोजाना रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है. सूरत, वडोदरा और राजकोट में भी कर्फ्यू लागू किया जा रहा है.

कोरोना ने मध्य प्रदेश में भी तेजी से पैर पसारने शुरू कर दिये हैं, जिसके बाद वहां की सरकार ने राज्य के पांच जिलों में रात्रि कर्फ्यू लगा दिया है. मध्य प्रदेश के पांच जिलों भोपाल, इंदौर, विदिशा, रतलाम और ग्वालियर में रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है. हालांकि कर्फ्यू में परिवहन और औद्योगिक इकाइयों पर कोई पाबंदी नहीं है. स्कूलों पर भी कोरोना की मार पड़ी है. मध्य प्रदेश में कक्षा एक से आठ तक के स्कूल बंद कर दिये गये हैं.

हालांकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि अभी कोई लॉकडाउन नहीं लगाया जा रहा है, लेकिन जिन जिलों में हालात बिगड़ते दिखेंगे, वहां कंटेंनमेंट जोन की पहचान कर संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए निर्णय लिया जायेगा.

दीपावली के बाद राजस्थान में भी कोरोना के मामले में अचानक तेजी से बढ़ोतरी हुई है. कोरोना के खतरे को देखते हुए राजस्थान सरकार ने पूरे राज्य में धारा-144 लागू करने का निर्णय लिया है. धारा-144 लागू होने के बाद एक जगह पर चार से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकते हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना के तेजी से फैल रहे संक्रमण के मद्देनजर लोगों से एक जगह जमा न होने की अपील भी की है.

हरियाणा में सरकार ने लॉकडाउन के बाद स्कूलों में छात्रों को दी गयी छूट को वापस ले लिया है. राज्य सरकार ने पिछले महीने स्कूलों को खोलने का फैसला किया था, लेकिन कई स्कूलों में बच्चों में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने के बाद अब स्कूलों को फिर से बंद करने का फैसला लिया है.

हरियाणा सरकार ने 30 नवंबर तक सभी स्कूलों को पूरी तरह बंद कर दिया है. महाराष्ट्र में भी मुंबई में अब 31 दिसंबर स्कूल बंद कर दिये हैं. राजधानी दिल्ली में भी संक्रमण फैला है और वहां धार्मिक व सामाजिक समारोहों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या घटा कर 50 कर दी गयी है. उत्तर प्रदेश में बिना मास्क के 2000 रुपये के जुर्माना का प्रावधान कर दिया गया है और इस नियम को कड़ाई से लागू किया जा रहा है.

कोरोना से बचने के केवल तीन उपाय हैं- दूरी बनाये रखें, हाथ लगातार धोएं और मास्क अवश्य लगाएं. कोरोना के टीके में अभी देरी है. कब आयेगा और कब आप तक पहुंचेगा, इसकी सही-सही जानकारी किसी के पास नहीं है, लेकिन जो उपाय हमारे हाथों में हैं, लोग उनका भी पालन करते नजर नहीं आ रहे हैं. भीड़-भाड़ वाले स्थान पर मास्क बेहद आवश्यक है, लेकिन आपको बड़ी संख्या में ऐसे लोग नजर आयेंगे, जो मास्क नहीं लगाये हुए होंगे.

मेहरबानी करके मास्क जरूर पहनें. यह कोरोना संक्रमण की रोकथाम का सबसे अहम अस्त्र है. विशेषज्ञों की राय है कि हम सबको मास्क को अब जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लेना होगा. कोरोना के संक्रमण से अपने आपको और दूसरों को बचाने के लिए मास्क पहनना बेहद जरूरी हो गया है.

मास्क पहनने से कोरोना वायरस के संक्रमण के विस्तार को रोकने की कई गुना संभावनाएं बढ़ जाती हैं. अमेरिका और इटली में किये गये शोध में पाया गया है कि जब वहां मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया, तो मरीजों की संख्या में खासी कमी आयी. एक अध्ययन के अनुसार मास्क पहनने से कोरोना संक्रमण के खतरे को 85 फीसदी तक कम किया जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी बहुत पहले ही मास्क पहनना अनिवार्य कर देने की सलाह दी थी.

देखने में आया कि जैसे-जैसे देश में कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में छूट दी गयी, वैसे-वैसे लोगों ने जैसे मान लिया है कि कोरोना अब समाप्त हो गया है. बाजारों में भीड़ जमा होने लगी. लोग समारोहों में शामिल होने लगे और लापरवाह नजर आने लगे, जबकि यह समय सबसे अधिक सावधानी बरतने का है.

शहरों के चौराहों पर जाम देखने को मिल रहा है. लोग आपस में एक-दूसरे से दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं. बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल ही नहीं, यह पूरे देश की कहानी है. कुछेक लोगों ने तो मास्क को उतार कर फेक दिया है, जबकि विशेषज्ञ बार-बार कह रहे हैं कि मास्क और हाथ धोना कोरोना संक्रमण को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है, लेकिन लोगों ने मान लिया कि मास्क कोई महत्वपूर्ण चीज नहीं है.

अगर आपको मास्क से दिक्कत है, तो आप गमछा से मुंह ढकें. गमछा हमारी पुरानी परंपरा का हिस्सा भी है. घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना सबके लिए जरूरी है. विभिन्न राज्यों ने इसे कानूनन अनिवार्य भी कर दिया है. इसकी अनदेखी करने पर जुर्माने का प्रावधान तक है. लापरवाही का ही नतीजा है कि देश की राजधानी दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कोरोना और तेजी से वापस लौटा है.लोगों की लापरवाही भारी पड़ती नजर आ रही है.

एक राहत की बात जरूर है कि हमारे देश में लोग तेजी से स्वस्थ भी हो रहे हैं. अब तक कोरोना से संक्रमित 85 लाख से अधिक लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं. कई अन्य देशों की तुलना में स्वस्थ होने की दर भारत में बेहतर है. साथ ही कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की संख्या भारत में विश्व की तुलना में काफी कम है, लेकिन यह बात सभी को स्पष्ट होनी चाहिए कि यह लड़ाई लंबी चलनी है. इस मामले में जरा-सी भी लापरवाही न केवल आपको, बल्कि आपके परिवार और पूरे समाज को संकट में डाल सकती है.

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि देश में अब भी कोरोना संक्रमण के लगभग 50 हजार के आसपास मामले रोजाना सामने आ रहे हैं. यह बात हम सभी को स्पष्ट होनी चाहिए कि इस वायरस का फिलहाल कोई इलाज नहीं है और हमें पूरी सावधानी बरती होगी. इस मामले में कोई भी लापरवाही भारी पड़ सकती है.

posted by : sameer oraon

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Ashutosh Chaturvedi

लेखक के बारे में

By Ashutosh Chaturvedi

मीडिया जगत में तीन दशकों से भी ज्यादा का अनुभव. भारत की हिंदी पत्रकारिता में अनुभवी और विशेषज्ञ पत्रकारों में गिनती. भारत ही नहीं विदेशों में भी काम करने का गहन अनु‌भव हासिल. मीडिया जगत के बड़े घरानों में प्रिंट के साथ इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का अनुभव. इंडिया टुडे, संडे ऑब्जर्वर के साथ काम किया. बीबीसी हिंदी के साथ ऑनलाइन पत्रकारिता की. अमर उजाला, नोएडा में कार्यकारी संपादक रहे. प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साथ एक दर्जन देशों की विदेश यात्राएं भी की हैं. संप्रति एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य हैं.

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