सिक्कों की खन-खन

Updated at : 04 May 2017 6:55 AM (IST)
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सिक्कों की खन-खन

क्षमा शर्मा वरिष्ठ पत्रकार सिक्कों की खन-खन. दीवाली पर लक्ष्मी के माथे पर सुशोभित चांदी का सिक्का. उनके हाथों से सोने के सिक्के की बारिश. शादी के शुभ अवसर पर पूजा के थाल से लेकर दूल्हे के ऊपर और विदा होते वक्त दुल्हन के ऊपर न्योछावर किये जाते सिक्के. दादी की संदूकची के किसी कोने […]

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क्षमा शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार
सिक्कों की खन-खन. दीवाली पर लक्ष्मी के माथे पर सुशोभित चांदी का सिक्का. उनके हाथों से सोने के सिक्के की बारिश. शादी के शुभ अवसर पर पूजा के थाल से लेकर दूल्हे के ऊपर और विदा होते वक्त दुल्हन के ऊपर न्योछावर किये जाते सिक्के. दादी की संदूकची के किसी कोने में बच्चों की नजरों से छिपाये गये सिक्के, तो वहीं मां के पल्लू की ठोक से बंधे वक्त-जरूरत काम आनेवाले सिक्के. किसी नदी के ऊपर से गुजरो, तो पानी में अर्पित किये जाते सिक्के और छपाक की आवाज करते उन्हें ढूंढते लोग.
सिक्के हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा हैं, जो कि अब धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं. जब से मुद्रा के रूप में कागज के नोटों का चलन बढ़ा, तब से सिक्के अपदस्थ हो गये. उनकी खनखनाहट धीरे-धीरे कम होती गयी. हालांकि, सिक्के हमारे इतिहास, सभ्यता और बीते हुए कल के गवाह होते हैं.
पहले वेतन या किसी शुभ अवसर पर जब सिक्कों की जगह नोट हाथ में आते थे, तो उनकी ऊर्जा और शक्ति महसूस होती थी. फिर उनकी जगह चेक ने ले ली. चेक से जब वेतन मिलने लगा, तो एक सहयोगी की पत्नी ने कहा- चेक तो तुम वहां का वहां ही बैंक में जमा कर आते हो.
जब नोट लाते थे, तो सबसे पहले मैं उन्हें भगवान के सामने चढ़ाती थी कि हे भगवान! नौकरी हमेशा बनी रहे, ताकि घर चलता रहे.
आजकल तो अब चेक भी हाथ में नहीं आता. पैसे सीधे बैंक में चले जाते हैं. और खरीदारी करने के लिए भी साक्षात रुपये-पैसे नहीं, प्लास्टिक के कार्ड काम में आता है. इसे प्लास्टिक मनी कहते हैं. अक्सर पता नहीं चलता कि कितना पैसा आया था, कितना खर्च हुआ. दुकान में जाकर चीजों को छूने, स्पर्श करने, भाव-ताव करने का जो आनंद था, वह भी आॅनलाइन खरीदारी में जाता रहा है.
पिछले दिनों मेरी बेटी ने कहा- मेरे अकाउंट में इतने पैसे थे, कहां गये. अकाउंट खाली कैसे हो गया. बाद में पता चला कि सब आॅनलाइन खरीददारी की मेहरबानी थी.
घर में छप्पर फाड़ धन वर्षा करने के लिए लक्ष्मी की पूजा की जाती है. घर की तिजोरियों में भी उनकी फोटो रखी जाती है. अब जब तिजोरियां ही नहीं रहेंगी, तो लक्ष्मी की क्या आॅनलाइन ही पूजा करनी पड़ेगी!
दुनियाभर में लोग खजानों की खोज में निकलते रहे हैं. इन यात्राओं की रोमांचक कथाएं लोगों के मन में बसी हुई हैं. लेकिन, अब आगे आनेवाली पीढ़ियां गड़े धन के मिल जाने के रोमांच को कैसे महसूस करेंगी. पैसे को छूने, महसूस करने का सुख आॅनलाइन जमाने ने जैसे खत्म कर दिया है.
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