विशेष राज्य के दरजे की राजनीति

विशेष राज्य के दरजे की मांग के समर्थन में दो मार्च को ‘झारखंड बंद’ के एलान पर सवाल खड़े किये जा सकते हैं. गौरतलब है कि झारखंड राज्य को अलग हुए 13 साल गुजर गये हैं. राज्य में खनिजों के अकूत भंडार के बावजूद यहां की जनता दो कदम आगे बढ़ने के बजाय चार कदम […]
विशेष राज्य के दरजे की मांग के समर्थन में दो मार्च को ‘झारखंड बंद’ के एलान पर सवाल खड़े किये जा सकते हैं. गौरतलब है कि झारखंड राज्य को अलग हुए 13 साल गुजर गये हैं.
राज्य में खनिजों के अकूत भंडार के बावजूद यहां की जनता दो कदम आगे बढ़ने के बजाय चार कदम पीछे चली गयी है. भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण झारखंडवासियों की यह दुर्दशा देख कर शर्मसार होना स्वाभाविक है, सभ्य पुरु षार्थ के लिए.
बालू की राजनीति ने तो हद पार कर दी है. एक ओर जहां सड़क चौड़ीकरण के तहत गरीब और असहाय लोगों के झोपड़े उजड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बालू की किल्लत ने लोगों के सिर छुपाने की जगह के निर्माण पर भी आफत कर दी है. ऐसे में अगर झारखंड को विशेष राज्य का दरजा मिल भी जाये तो क्या? अब भी समय है. जब जागो तभी सबेरा.
महावीर साहू, ई-मेल से
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










