विशेष राज्य के दरजे की राजनीति

Published at :28 Feb 2014 4:55 AM (IST)
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विशेष राज्य के दरजे की राजनीति

विशेष राज्य के दरजे की मांग के समर्थन में दो मार्च को ‘झारखंड बंद’ के एलान पर सवाल खड़े किये जा सकते हैं. गौरतलब है कि झारखंड राज्य को अलग हुए 13 साल गुजर गये हैं. राज्य में खनिजों के अकूत भंडार के बावजूद यहां की जनता दो कदम आगे बढ़ने के बजाय चार कदम […]

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विशेष राज्य के दरजे की मांग के समर्थन में दो मार्च को ‘झारखंड बंद’ के एलान पर सवाल खड़े किये जा सकते हैं. गौरतलब है कि झारखंड राज्य को अलग हुए 13 साल गुजर गये हैं.

राज्य में खनिजों के अकूत भंडार के बावजूद यहां की जनता दो कदम आगे बढ़ने के बजाय चार कदम पीछे चली गयी है. भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण झारखंडवासियों की यह दुर्दशा देख कर शर्मसार होना स्वाभाविक है, सभ्य पुरु षार्थ के लिए.

बालू की राजनीति ने तो हद पार कर दी है. एक ओर जहां सड़क चौड़ीकरण के तहत गरीब और असहाय लोगों के झोपड़े उजड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बालू की किल्लत ने लोगों के सिर छुपाने की जगह के निर्माण पर भी आफत कर दी है. ऐसे में अगर झारखंड को विशेष राज्य का दरजा मिल भी जाये तो क्या? अब भी समय है. जब जागो तभी सबेरा.

महावीर साहू, ई-मेल से

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