बेकार के मुद्दे पर राजनीतिक कसरत

इन दिनों हमारे झारखंड राज्य को विशेष राज्य बनाने की मांग जोरों पर है. लेकिन नेताओं को सोचना चाहिए कि झारखंड को विशेष राज्य बना देने से कोई फायदा नहीं होने वाला, क्योंकि जहां पर केंद्र सरकार को राशि सरेंडर कर दी जाती है, चार सौ करोड़ रुपये का गबन करनेवाला नेता कुछ दिनों तक […]
इन दिनों हमारे झारखंड राज्य को विशेष राज्य बनाने की मांग जोरों पर है. लेकिन नेताओं को सोचना चाहिए कि झारखंड को विशेष राज्य बना देने से कोई फायदा नहीं होने वाला, क्योंकि जहां पर केंद्र सरकार को राशि सरेंडर कर दी जाती है, चार सौ करोड़ रुपये का गबन करनेवाला नेता कुछ दिनों तक जेल में रहने के बाद बाहर आकर ठाट से घूमता है, जहां प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है और फिर भी विकास नहीं हो पा रहा है तो क्या विशेष राज्य का दर्जा मिल जाने के बाद क्या यहां के नेता भ्रष्टाचार छोड़ कर विशेष राज्य का लाभ आम आदमी तक पहुंचायेंगे?
अब इस हालत में केंद्र सरकार को दोषी ठहराना किस हद तक सही है? इस राज्य में कुछ पार्टियों को बैठे-बिठाये एक बेकार सा मुद्दा मिल गया है, और इसी की बुनियाद पर लोगों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं.
रोहित कुमार, ई-मेल से
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