सड़कों के लिए भी तय होगी जवाबदेही

Published at :26 Feb 2014 3:59 AM (IST)
विज्ञापन
सड़कों के लिए भी तय होगी जवाबदेही

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने सड़कों को सुधार कर राज्य के लोगों का दिल जीता था. अच्छी सड़कों ने बिहार की तसवीर बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभायी थी. लेकिन समय के साथ सड़कों का रख-रखाव ठीक से नहीं होने से ये खराब होने लगीं और सरकार की छवि भी. इससे चिंतित सरकार सड़कों […]

विज्ञापन

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने सड़कों को सुधार कर राज्य के लोगों का दिल जीता था. अच्छी सड़कों ने बिहार की तसवीर बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभायी थी. लेकिन समय के साथ सड़कों का रख-रखाव ठीक से नहीं होने से ये खराब होने लगीं और सरकार की छवि भी. इससे चिंतित सरकार सड़कों के रख-रखाव के लिए नीति तैयार करने में जुट गयी. अब उस नीति पर कैबिनेट की मुहर मिल चुकी है.

इंफ्रास्ट्रर के लिए ऐसी नीतियां वक्त की जरूरत हैं. बिहार व झारखंड दोनों ही राज्यों में सरकारी धन से तो आधारभूत संरचनाएं तैयार तो हो जाती हैं, लेकिन इनको बरकरार रखने के लिए न तो धन का इंतजाम होता है और न ही कोई स्पष्ट नीति होती है. सड़क संगठन के मुताबिक आनेवाले सालों में बिहार-झारखंड में बनने वाली सड़कों की लंबाई देश भर में बनने वाली सड़कों का एक तिहाई है. मतलब आनेवाले दिनों सड़क के मामले में दोनों राज्यों को लंबी दूरी तय करनी है. बिहार सरकार ने सड़कों के रख-रखाव की जिस नीति को मंजूरी दी है, उसमें इनका वर्गीकरण भी किया गया है.

साथ ही यह भी तय किया गया है कि सड़कों का विकास कैसे हो. इस नीति की सबसे बड़ी खासियत यह बतायी जा रही है कि ग्रामीण विकास विभाग की ओर से बनने वाली सड़कों की उम्र निर्धारित कर दी जायेगी. इससे सड़कों के लिए बजट तैयार करने में आसानी होगी. अभी स्थिति यह है कि एक ओर से सड़कें बनती हैं और दूसरी ओर से वे उखड़ने लगती हैं. इसका मुख्य कारण अब तक तो यह बताया जाता रहा है कि समग्र नीति का अभाव है. बिहार सरकार ने मेंटीनेंस नीति बना कर इसकी भरपाई कर दी है. इसी तरह की नीति झारखंड में भी बनायी जानी चाहिए.

झारखंड की सड़कों के लिए मेंटीनेंस नीति की जरूरत इस कारण भी है कि अधिकांश इलाका खदानों का है. खदानों से खनिज की ढुलाई के कारण सड़कों की उम्र काफी कम होती है. साथ ही झारखंड में औसत बारिश भी दूसरे राज्यों के मुकाबले अधिक होती है और सड़कों के लिए जल जमाव दुश्मन की तरह है. सड़क इंजीनियरिंग के क्षेत्र में लगातार नये प्रयोग हो रहे हैं. इस तरह के प्रयोग बिहार-झारखंड में नहीं हो रहे हैं. इस कमी की भरपाई करने का काम बिहार ने शुरू किया है. उम्मीद है झारखंड में भी जल्द ही इस तरह की नीति को सरकार मंजूरी देगी.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola