धमकी देने की जगह गिरेबां में झांकें नेता

Published at :26 Feb 2014 3:58 AM (IST)
विज्ञापन
धमकी देने की जगह गिरेबां में झांकें नेता

अपनी गलती का अहसास रहा होगा जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कुचलने की धमकी देनेवाले गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे अब कह रहे हैं कि उनका आशय सोशल मीडिया से था, जिसने बीते दिनों पूर्वोत्तर के प्रवासी लोगों के बीच हैदराबाद और कर्नाटक में भय का माहौल पैदा करने में भूमिका निभायी. कमान से छूटा तीर और […]

विज्ञापन

अपनी गलती का अहसास रहा होगा जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कुचलने की धमकी देनेवाले गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे अब कह रहे हैं कि उनका आशय सोशल मीडिया से था, जिसने बीते दिनों पूर्वोत्तर के प्रवासी लोगों के बीच हैदराबाद और कर्नाटक में भय का माहौल पैदा करने में भूमिका निभायी. कमान से छूटा तीर और मुंह से निकली बात वापस नहीं लौटते.

जो बात सोच-विचार कर न कही गयी हो, वह तीर की तरह ही घाव करती है. शिंदे साहब अब चाहे जो मरहम-पट्टी करें, लेकिन एक गृहमंत्री के मुंह से मीडिया को कुचलने की धमकी निकलना लोकतांत्रिक व्यवस्था को घाव पहुंचाने का प्रयास ही माना जायेगा. मीडिया से नाराज सिर्फ शिंदे साहब ही नहीं हैं. रोहतक रैली से अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करनेवाली आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को भी लगता है कि मीडिया नरेंद्र मोदी की तरफदारी में लगा हुआ है. लेकिन, किसी पार्टी के नेता के मुंह से निकली बात और गृहमंत्री के मुंह से निकली बात के बीच फर्क किया जाना चाहिए.

गृहमंत्री देश की व्यवस्था के नियामकों में एक होता है. मीडिया कवरेज से नाराजगी के आधार पर किसी गृहमंत्री द्वारा उसे कुचलने की धमकी देना अपने पद की गरिमा और कर्तव्यबोध के साथ दगा करने जैसी बात है. जो राय भीड़ की होती है, वही राय पुलिस की भी होने लगे और जो राय पुलिस की होती है वही जज की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की हो, तो न्याय की धारणा का क्या होगा? मुख्यधारा के मीडिया के बारे में अकसर कहा जाता है कि उसमें खबरों व विचारों के चयन में जनहित से ज्यादा व्यावसायिक हितों का ध्यान रखा जा रहा है.

लेकिन मीडिया इंडस्ट्री के भीतर व्यावसायिक हितों की बढ़वार से होती जनहित हानि पर लगाम लगाने के लिए यदि कोई सर्वसम्मत इंतजाम नहीं हो पाया है, तो दोष व्यवस्था के नियामकों का भी है. याद रखना चाहिए कि राजनीति की तरह मीडिया को भी लोगों का भरोसा अर्जित करना पड़ता है, तभी व्यवसाय के रूप में उसकी गति जारी रह सकती है. जब तक मीडिया पर लोगों का भरोसा कायम है, उसे कुचलने की बात कहने की जगह राजनेता को देखना चाहिए कि कहीं उसकी राजनीति उसके ही कारनामों से जनता का विश्वास खो तो नहीं रही.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola