पहले नेता लोग एकमत तो हो जायें!

विशेष राज्य का दरजा अब झारखंड को भी मिलना चाहिए-यह राजनेताओं का कहना है. लेकिन यहां की जनता को क्या चाहिए? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा. झारखंड बने हुए 14 साल होने वाले हैं, लेकिन अभी तक कभी कोई स्थायी सरकार नहीं बन पायी है, जो इस हक लड़ाई को एक व्यवस्थित ढंग से आगे […]
विशेष राज्य का दरजा अब झारखंड को भी मिलना चाहिए-यह राजनेताओं का कहना है. लेकिन यहां की जनता को क्या चाहिए? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा. झारखंड बने हुए 14 साल होने वाले हैं, लेकिन अभी तक कभी कोई स्थायी सरकार नहीं बन पायी है, जो इस हक लड़ाई को एक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ा सके.
लेकिन जनता इन गंठबंधनों की सरकारों का क्या करे? इसकी एक भी गांठ खुलती है, तो सरकार का हाल बेहाल हो जाता है. आप किसी भी मुद्दे को तब आगे बढ़ा सकते हैं, जब आप एकमत हों. लेकिन, झारखंड में कोई इधर, कोई उधर. यहां तो एक दल के नेता भी एकमत नहीं हैं. एक स्थायी सरकार के साथ ही विशेष राज्य के मुद्दे को उठाया जा सकता है. हमारा राज्य खनिज संपदा से समृद्ध होते हुए भी पिछड़ा है. क्या इसकी जिम्मेवार जनता नहीं है?
रविकांत गुप्ता, रांची
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