छोटे नोट बढ़ाने होंगे
Updated at : 11 Nov 2016 6:01 AM (IST)
विज्ञापन

सरकार द्वारा काला धन रोकने की दिशा में बड़े मूल्य वाले नोटों के विमुद्रीकरण को सकारात्मक कदम माना जाना चाहिए़ लेकिन यह जिस तरह से यह व्यवस्था लागू किया गया है, वह देश की अर्थव्यवस्था, कारोबार और सत्तर फीसदी गरीब जनता के लिए बुरे नतीजे देगा. बीते तीन-चार सालों में देश में सौ, पचास, बीस […]
विज्ञापन
सरकार द्वारा काला धन रोकने की दिशा में बड़े मूल्य वाले नोटों के विमुद्रीकरण को सकारात्मक कदम माना जाना चाहिए़ लेकिन यह जिस तरह से यह व्यवस्था लागू किया गया है, वह देश की अर्थव्यवस्था, कारोबार और सत्तर फीसदी गरीब जनता के लिए बुरे नतीजे देगा. बीते तीन-चार सालों में देश में सौ, पचास, बीस और दस के नोटों की संख्या में भारी कमी आयी है.
पहले तो सरकार को अपने ढ़ाई साल के कार्यकाल में ऐसे नोटों की संख्या को दस से बीस गुना बढ़ाना चाहिए था. यह मालूम हो कि त्योहारों, लेन-देन और बिक्री-बट्टे के लिए ऐसे नोटों की जरूरत अधिक होती है़ इसके अलावा मजदूरों के लिए छोटे नोटों की अधिक अहमियत होती है. छोटे नोट काला धन जमा करने में काम नहीं आते हैं. बड़े मूल्य वाले दो हजार के नोट जारी करना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है.
डॉ चंद्रभूषण चौधरी , रांची
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




