अब तो बख्श दो!
Updated at : 13 Oct 2016 12:19 AM (IST)
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आतंकवाद ग्रस्त इस देश की सेना ने एक रात विदेशी आतंकियों के ठिकानों पर हमला बोला. सारा देश सेना की ताकत और साहस के समक्ष गर्व से नतमस्तक हो गया. मगर अचानक हवा ने रुख बदला. जवानों की शौर्यगाथा छिछली राजनीति की बलि चढ़ गयी. राजनीति के दलदल में आकंठ डूबे पक्ष-विपक्ष दोनों ने ही […]
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आतंकवाद ग्रस्त इस देश की सेना ने एक रात विदेशी आतंकियों के ठिकानों पर हमला बोला. सारा देश सेना की ताकत और साहस के समक्ष गर्व से नतमस्तक हो गया. मगर अचानक हवा ने रुख बदला. जवानों की शौर्यगाथा छिछली राजनीति की बलि चढ़ गयी. राजनीति के दलदल में आकंठ डूबे पक्ष-विपक्ष दोनों ने ही आपने विरोधियों को मौकापरस्त और देशद्रोही साबित करने का मौका फौरन लपक लिया. खबरिया चैनलों पर बहस होने लगी.
इनका कोई नतीजा चाहे न निकले, मगर जलील तो हम होते हैं. सेना ने अपनी सहनशीलता और धैर्य का परिचय देते हुए खामोश ही रहना उचित समझा. मगर देश में जबरन सैनिकों की वीरता पर संदेह करने का माहौल बनाकर हमारी जगहंसाई कराने में किसी ने कोई कसर नहीं छोड़ी. हद हो गयी, तिरंगे में लिपटे सैनिकों की आड़ में सियासत करनेवालो! अब तो बख्श दो!
एमके मिश्रा, रातू, रांची
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