बाढ़ का हाल!
Updated at : 30 Aug 2016 5:20 AM (IST)
विज्ञापन

देश में कभी भयंकर सूखा, तो कभी बाढ़ से न जाने कितनी जान माल की क्षति प्रति वर्ष होती है. अभी बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बंगाल समेत कई प्रांत भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं. देश में लगभग चालीस वर्ष पूर्व 1976 में राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की स्थापना हुई थी, जिसमे बाढ़ […]
विज्ञापन
देश में कभी भयंकर सूखा, तो कभी बाढ़ से न जाने कितनी जान माल की क्षति प्रति वर्ष होती है. अभी बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बंगाल समेत कई प्रांत भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं.
देश में लगभग चालीस वर्ष पूर्व 1976 में राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की स्थापना हुई थी, जिसमे बाढ़ के वैज्ञानिक प्रबंधन, इससे जनित कष्टों के निवारण हेतु 207 सिफारिशें की गयी थीं, जिमसे सिर्फ 25 को ही केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था. दुर्भाग्य से इस पर अभी तक कुछ खास नहीं हुआ है. पिछले लगभग 70 वर्षों से नदियों की सफाई और खुदाई और इनके आपस में जोड़ने के अभाव में इस गंभीर समस्या से आज भी बहुत बड़ी राष्ट्रीय क्षति दुर्भाग्य से जारी है. इसलिए अब सरकार को सूखे और बाढ़ के नियंत्रण और संतुलन से कुछ नये ऐतिहासिक और ठोस कार्य करने होंगे.
वेद मामूरपुर, नरेला
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




