भारत की बढ़ती साख

Updated at : 09 Jun 2016 6:26 AM (IST)
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भारत की बढ़ती साख

यों तो दुनिया का हर मुल्क अपने को स्वायत्त और स्वतंत्र मानता है, लेकिन आज की दुनिया में राष्ट्रों की यह मान्यता संतुलन के एक नाजुक धागे पर टिकी है. आज हर राष्ट्र उतना ही स्वतंत्र या स्वायत्त है, जितना वैश्विक बिरादरी, खासकर ताकतवर देशों की, स्वीकार करती है. राष्ट्रों के व्यवहार के बारे में […]

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यों तो दुनिया का हर मुल्क अपने को स्वायत्त और स्वतंत्र मानता है, लेकिन आज की दुनिया में राष्ट्रों की यह मान्यता संतुलन के एक नाजुक धागे पर टिकी है. आज हर राष्ट्र उतना ही स्वतंत्र या स्वायत्त है, जितना वैश्विक बिरादरी, खासकर ताकतवर देशों की, स्वीकार करती है.
राष्ट्रों के व्यवहार के बारे में भी कुछ नियम तय हैं और किसी राष्ट्र द्वारा इसका पालन न करने पर विश्व-बिरादरी प्रतिबंधों की शक्ल में उसे दंडित करती है. यही वजह है कि संहारक हथियार या प्रक्षेपास्त्र बनाते वक्त राष्ट्रों को विश्व-बिरादरी के सामने साबित करना पड़ता है कि यह सब उसने आत्मरक्षा के लिए किया है और इससे दुनिया के अमन-चैन को कोई खतरा नहीं है. ठीक इसी तरह कोई देश आतंकवाद से पीड़ित होने के चाहे जितने दावे करे, परंतु जब तक विश्व-बिरादरी उसके दावे को मान नहीं लेती, तब तक आतंकवाद रोधी अंतरराष्ट्रीय सहायता की उम्मीद बेमानी ठहरती है.
इस लिहाज से भारत ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के बीच दो बड़ी कामयाबी हासिल की है. पहली, ग्रुप-7 देशों द्वारा 1987 में स्थापित मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (एमसीटीआर) में भारत को प्रवेश मिला है, तो दूसरी, चीन ने पहली दफे माना है कि मुंबई हमले में पाकिस्तानी आतंकियों का हाथ था. एमसीटीआर की सदस्यता से जहां भारत उच्च श्रेणी की मिसाइल तकनीक और सर्विलांस ड्रोन खरीद सकता है, वहीं रूस के साथ निर्मित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दूसरे देशों को बेच भी सकता है.
साथ ही स्वदेशी तकनीक से निर्मित कुछ प्रक्षेपास्त्रों को ज्यादा-से-ज्यादा दूरी तक प्रक्षेपित करने के उपकरण और तकनीक भी भारत को हासिल होगी, जो रक्षा-उत्पादों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.
उधर, मुंबई हमला मामले में चीन के बदले हुए रुख को भी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भारत की बढ़ती साख का संकेत माना जायेगा. जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र में आंतकियों की सूची में डालने के भारत के प्रयासों में चीन ने अडंगा लगाया था, लेकिन अब सरकारी टीवी पर दिखायी डॉक्यूमेंटरी में मुंबई हमले में पाकिस्तानी आतंकियों को शामिल बता कर चीन ने एक तरह से मान लिया है कि आतंकवाद के विरुद्ध बन रहे वैश्विक जनमत के सामने पाकिस्तान का पक्षपोषण करना खुद उसकी साख के लिए खतरा है.
चीन के बदले रुख के बाद भारत के लिए विश्व-बिरादरी के बीच पाकिस्तान को दक्षिण एशिया में आतंकवाद का जवाबदेह देश बताने में सुविधा होगी. एमसीटीआर में शामिल होने और पाकिस्तान को आतंकवाद के मोर्चे पर घेरने की कोशिशें भारत वर्षों से कर रहा है. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख के बीच ये कोशिशें परवान चढ़ती दिख रही हैं.
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