नेपाल की कड़वाहट

नेपाली राष्ट्रपति का भारत दौरा स्थगित होने, बुद्ध पूर्णिमा के आयोजन में भारतीय प्रधानमंत्री के शामिल होने की संभावना खत्म होने और और दिल्ली से नेपाली राजदूत को वापस बुलाने जैसी हालिया घटनाएं भारत-नेपाल संबंधों में लगातार बढ़ते खटास को रेखांकित करती हैं. पिछले साल नेपाल की आंतरिक राजनीति में उथल-पुथल, मधेशी आंदोलन और आवश्यक […]
नेपाली राष्ट्रपति का भारत दौरा स्थगित होने, बुद्ध पूर्णिमा के आयोजन में भारतीय प्रधानमंत्री के शामिल होने की संभावना खत्म होने और और दिल्ली से नेपाली राजदूत को वापस बुलाने जैसी हालिया घटनाएं भारत-नेपाल संबंधों में लगातार बढ़ते खटास को रेखांकित करती हैं. पिछले साल नेपाल की आंतरिक राजनीति में उथल-पुथल, मधेशी आंदोलन और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही बाधित होने को लेकर नेपाल ने भारत पर गंभीर आरोप लगाये थे, जिसके कारण दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में तनाव पैदा हो गया था.
लेकिन, नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की हालिया यात्रा के बाद माना जा रहा था कि स्थितियां फिर से बदल रही हैं. लेकिन पिछले दिनों के घटनाक्रम बताते हैं कि हकीकत कुछ और है. नेपाल ने भले सफाई दी हो कि ताजा घटनाक्रम को द्विपक्षीय संबंधों में तनातनी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन इससे इस सवाल का जवाब नहीं मिलता है कि नेपाल के राजनीतिक संकट के मामले में राजदूत को वापस बुलाने का क्या तुक है?
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