भयावह आपदा

Updated at : 21 Apr 2016 6:22 AM (IST)
विज्ञापन
भयावह आपदा

देश के करीब 33 करोड़ लोग सूखे की चपेट में हैं. इसका मतलब है कि 25 फीसदी से अधिक आबादी पीने के पानी की कमी और खेती के संकट से जूझ रही है. यह जानकारी केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को दी है. इसके मुताबिक 254 जिलों के 2.55 लाख गांवों में हालात बेहद खराब […]

विज्ञापन
देश के करीब 33 करोड़ लोग सूखे की चपेट में हैं. इसका मतलब है कि 25 फीसदी से अधिक आबादी पीने के पानी की कमी और खेती के संकट से जूझ रही है. यह जानकारी केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को दी है. इसके मुताबिक 254 जिलों के 2.55 लाख गांवों में हालात बेहद खराब हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में सूखे की स्थिति इससे भी बदतर है, क्योंकि इसमें बिहार, हरियाणा समेत कुछ अन्य इलाकों का उल्लेख नहीं है, जहां बारिश काफी कम हुई है. इतना ही नहीं, गुजरात के संकट को भी केंद्र सरकार की रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है, जबकि राज्य सरकार ने खुद ही माना है कि 637 से अधिक गांवों में पानी की गंभीर किल्लत है. न्यायालय ने सूखे से निबटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा की जा रही कोशिशों को नाकाफी बताते हुए साफ कहा है कि सरकार की जिम्मेवारी महज धन मुहैया करने तक सीमित नहीं है. यह बहुत चिंता की बात है कि जिस आपदा से देश के 12 राज्य त्रस्त हों, वहां राहत पहुंचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को दिशा-निर्देश जारी करना पड़ रहा है. केंद्र सरकार का पक्ष अपनी जगह तर्कपूर्ण हो सकता है, पर समुचित मदद मुहैया कराने तथा संकट के ठोस समाधान की दिशा में पहल करने में उसका प्रदर्शन निराशाजनक है.
न्यायालय में दर्ज याचिका में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण रोजगार योजना, खाद्य सुरक्षा कानून तथा केंद्र की सूखा संबंधी नियमावली जैसे वैधानिक कल्याणकारी प्रावधानों को ठीक से लागू नहीं कर रही हैं. न्यायालय ने निर्देशित किया है कि सूखे जैसी आपदा के बारे में राज्यों को समय रहते आगाह करने की जिम्मेवारी केंद्र की है और उसे इस संबंध में नयी तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए. सूखा, बाढ़, कम बारिश जैसी समस्याएं वैश्विक तापमान में वृद्धि का परिणाम हैं.
एक हालिया शोध में चेतावनी दी गयी है कि ये परिणाम मौजूदा अनुमानों से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. जलवायु परिवर्तन के आर्थिक नतीजों के एक अध्ययन में बताया गया है कि इसके कारण 2.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की वैश्विक वित्तीय परिसंपत्तियों का नुकसान संभावित है. भारत के लिए ये नतीजे बेहद खतरनाक हो सकते हैं.
ऐसे में सूखे से प्रभावितों को तात्कालिक मदद पहुंचाने के साथ सरकार को दीर्घकालिक नीतिगत पहल करनी चाहिए. जलवायु परिवर्तन व तापमान वृद्धि की समस्याओं के मद्देनजर जल-प्रबंधन, पर्यावरण, कृषि, शहरीकरण तथा उद्योग से जुड़े प्रयासों को सही दिशा में संचालित करना जरूरी है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola