यह कैसी धार्मिकता?

हमारे देश में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों का अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है. न्यायालयों के अनेक आदेशों और नागरिकों की अनगिनत शिकायतों के बावजूद शायद ही ऐसा कोई शहर या कस्बा है, जहां प्रशासनिक स्तर पर अतिक्रमण हटाने और रोकने के गंभीर प्रयास हुए हों. ऐसे अवैध कब्जे अक्सर धार्मिक स्थल बना कर किये जाते […]
हमारे देश में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों का अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है. न्यायालयों के अनेक आदेशों और नागरिकों की अनगिनत शिकायतों के बावजूद शायद ही ऐसा कोई शहर या कस्बा है, जहां प्रशासनिक स्तर पर अतिक्रमण हटाने और रोकने के गंभीर प्रयास हुए हों. ऐसे अवैध कब्जे अक्सर धार्मिक स्थल बना कर किये जाते हैं. सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे अतिक्रमणों को ‘ईश्वर का अपमान’ बताया है. न्यायालय ने सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों पर उसके पूर्ववर्ती निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए फटकार भी लगायी है.
मई, 2006 में गुजरात उच्च न्यायालय ने सड़कों पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया था. केंद्र सरकार ने उस समय इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. न्यायालय ने इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था. इस वर्ष मार्च में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस आदेश का पालन न किये जाने की शिकायत मिलने के बाद राज्यों से पहले दिये गये निर्देशों पर अमल किये जाने की रिपोर्ट मांगी थी, पर किसी भी राज्य ने इसका अनुपालन नहीं किया. इस रवैये से नाराज न्यायालय ने टिप्पणी दी है कि उसके आदेश ठंडे बस्ते में डालने के लिए पारित नहीं किये जाते हैं. सर्वोच्च न्यायालय की यह झल्लाहट स्वाभाविक है. सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को राजनीतिक प्रश्रय मिलता है.
राजनेताओं के दबाव के कारण प्रशासन के हाथ भी बंधे होते हैं. चूंकि ये अतिक्रमण कमाई के उद्देश्य से किये जाते हैं, इस वजह से अधिकारियों के लिए ये कब्जे भ्रष्टाचार और अवैध आमदनी का भी जरिया होते हैं. कई बार तो अतिक्रमण प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत से भी किया जाता है. धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण के साथ मुश्किल यह है कि इन्हें हटाने के सवाल को तुरंत धार्मिक भावनाओं से जोड़ दिया जाता है. अदालत ने सही ही कहा है कि ईश्वर का इरादा राह में अवरोध खड़ा करने का नहीं होता है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही इन अतिक्रमणों को हटाने के रास्ते की बाधा जरूर है. उम्मीद है कि न्यायालय के तल्ख निर्देश के बाद सरकारें अवैध कब्जों को हटाने के लिए तत्पर होंगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




