‘आप’ की दुकान पर रुसवा साहब

Published at :02 Jan 2014 5:11 AM (IST)
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‘आप’ की दुकान पर रुसवा साहब

।। सत्य प्रकाश चौधरी।। (प्रभात खबर, रांची) रुसवा साहब मेरा उस दुकान पर इंतजार कर रहे थे, जिस पर ताजा-ताजा ‘आप’ की दुकान का बोर्ड और झाड़ूधारी अरविंद केजरीवाल का कटआउट लगा है. जी हां, यह केजरी के नये-नये समर्थक बने पप्पू पनवाड़ी की ही दुकान है. कोई कनफ्यूजन न हो, इसलिए बोर्ड पर उन्होंने […]

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।। सत्य प्रकाश चौधरी।।

(प्रभात खबर, रांची)

रुसवा साहब मेरा उस दुकान पर इंतजार कर रहे थे, जिस पर ताजा-ताजा ‘आप’ की दुकान का बोर्ड और झाड़ूधारी अरविंद केजरीवाल का कटआउट लगा है. जी हां, यह केजरी के नये-नये समर्थक बने पप्पू पनवाड़ी की ही दुकान है. कोई कनफ्यूजन न हो, इसलिए बोर्ड पर उन्होंने यह भी लिखवा दिया है- ध्यान कहां है, पप्पू की दुकान यहां है. रुसवा साहब पारसी थियेटर शैली में गुनगुना रहे थे, जिसे पूरे 22 गज दूर से सुना जा सकता था.

मैंने नये साल की मुबारकबाद दी और पूछा, ‘‘समाजवादी नेताजी और भैयाजी के सैफई महोत्सव से आ रहे हैं क्या?’’ रुसवा साहब चौंक कर बोले, ‘‘क्यों?’’ ‘‘दरअसल, आप जो गाना गुनगुना रहे थे, पटा ले सैयां मिसकॉल से.. वह तो वहीं बज रहा था? क्या रंगीन समाजवाद का नजारा था! हीटर की गरमी में ऐसा आइटम डांस कि जिस्म गनगना जाये.’’ इस पर रुसवा साहब ऐसे तिलमिलाये मानो किसी ने आधी रात को हाड़ कंपाती ठंड में मुजफ्फरनगर के राहत कैंप से खींच कर बाहर निकाल दिया हो, ‘‘सुबह-सुबह किन पापियों का नाम ले लिया. दंगा पीड़ितों के बच्चे ठंड से कब्र में दफन हो रहे हैं और इन्हें अय्याशी सूझ रही है..

और काहे का महोत्सव? सीधे-सीधे कहो कि सरकारी खर्च पर मुजरा देख रहे थे और अपने वोटरों को दिखा रहे थे.. देश का माहौल ही ऐसा बन गया है कि नीरो ही प्रधानमंत्री के उम्मीदवार बन रहे हैं?’’ साल के पहले ही दिन रुसवा साहब का मिजाज बिगड़ता देख मैंने बात बदली, ‘‘अच्छा ये बताइए 2014 के लिए क्या दुआ मांगी है?’’ उन्होंने तंज करती मुस्कराहट के साथ कहा, ‘‘यही कि कुछ अक्ल खुदा तुम अखबारनवीसों को भी बख्श दे.’’ मैंने कहा, ‘‘ऐसी कौन-सी खता हो गयी है हमसे?’’ उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाय तिरछा सवाल किया, ‘‘कहां तक साइंस पढ़े हो?’’ ‘‘मैट्रिक तक’’ ‘‘थोड़ी और पढ़ लेते तो अच्छा था.’’ मैंने कहा, ‘‘ऐसा क्यों कह रहे हैं?’’ रुसवा साहब ने जवाब दिया, ‘‘क्या ऊलजुलूल खबरें छापते हो? सूत्रों ने कुछ सूत्र दिया और तुम लोग लग जाते हो उससे ख्याली रस्सी बटने में.

दो-तीन दिन पहले वो क्या खबर छपी थी.. हां, कि सूरत में इंडियन मुजाहिदीन परमाणु बम फोड़ने की तैयारी में था. परमाणु बम न हुआ, सुतली वाला पटाखा हो गया है कि कोई भी ऐरा-गैरा पलीते में आग लगा कर फोड़ देगा. मियां, परमाणु बम बनाने से ज्यादा मुश्किल है उसे दागने की तकनीक.. अच्छे-अच्छे मुल्कों के पास नहीं है. इसके लिए जो साधन चाहिए वो ओसामा तो जुटा नहीं पाया और तुम लोग बता रहे हो कि इंडियन मुजाहिदीन परमाणु बम फोड़ देगा!’’ तभी पप्पू बीच में टपक पड़े. नये साल का तुलसी किमाम वाला स्पेशल पान पेश करते हुए बोले, ‘‘छोड़िए, ई सब किचकिच तो चलता ही रहेगा.. अपना हिंदुस्तान पप्पू-फेंकू से मुक्त बने, 2014 में बस यही कामना कीजिए.’’

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