लोकतंत्र में असहमति का भी मान रहे

Updated at : 10 Mar 2016 12:48 AM (IST)
विज्ञापन
लोकतंत्र में असहमति का भी मान रहे

संविधान ने अनुच्छेद-19 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी दी है, लेकिन इसकी सीमा पार करने की नहीं. देश के हर नागरिक के लिए राष्ट्रवाद एक भावनात्मक पहलू है. देश के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर हमारा गुस्सा फूटना लाजिमी है. जेएनयू की घटना निंदनीय है, लेकिन जिस तरह से देश का विरोध करना नैतिक […]

विज्ञापन
संविधान ने अनुच्छेद-19 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी दी है, लेकिन इसकी सीमा पार करने की नहीं. देश के हर नागरिक के लिए राष्ट्रवाद एक भावनात्मक पहलू है. देश के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर हमारा गुस्सा फूटना लाजिमी है.
जेएनयू की घटना निंदनीय है, लेकिन जिस तरह से देश का विरोध करना नैतिक रूप से गलत है, उसी तरह विरोध को देशद्रोह समझना कानूनी रूप से गलत है़ इस मामले में सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए, क्योंकि इससे देश में माहौल खराब होता है और अतिरंजित राष्ट्रवाद और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिलता है, जिससे लोकतंत्र की छवि खराब होती है. अत: सरकार इस असहमति को मान दे और इसकी वजहें तलाशकर उन्हें दूर करे़
सुमित कुमार बड़ाईक, ई-मेल से
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola