आतंक और क्रिकेट की युगलबंदी

Updated at : 09 Mar 2016 5:45 AM (IST)
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आतंक और क्रिकेट की युगलबंदी

आतंकवाद भारत सहित दुनियाभर के देशों का सिरदर्द बना हुआ है़ सभी देश खुद को आतंकवाद से पीड़ित बता रहे हैं, लेकिन कुछ देश जो इस आतंकवाद की खेती में जी-जान से जुड़े हैं वे मानवता के दुश्मन हैं और ऐसे देशों के साथ सभ्य समाज को दूरी बना लेनी चाहिए़ लेकिन राजनीति का तकाजा […]

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आतंकवाद भारत सहित दुनियाभर के देशों का सिरदर्द बना हुआ है़ सभी देश खुद को आतंकवाद से पीड़ित बता रहे हैं, लेकिन कुछ देश जो इस आतंकवाद की खेती में जी-जान से जुड़े हैं वे मानवता के दुश्मन हैं और ऐसे देशों के साथ सभ्य समाज को दूरी बना लेनी चाहिए़
लेकिन राजनीति का तकाजा है कि दोस्ती और दुश्मनी वक्त की कसौटी पर की जाती है तभी तो भारत-पाकिस्तान धर्मशाला में टी20 क्रिकेट की तैयारियों में लगा हुआ है़
पाकिस्तान भारत को सुरक्षा इनपुट्स दे रहा है, जिस पर भारत गंभीर है लेकिन 1993 बंबई धमाकों से लेकर 2016 के पठानकोट हमले तक से किनारा कर अप्रत्यक्ष रूप से आतंक का समर्थन करने वाले देश के साथ खेल या राजनीति का समन्वय समझ से परे है़
अजय कुमार झा, खिदिरपुर, कोलकाता
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