ईरान और भारत

Updated at : 19 Jan 2016 6:33 AM (IST)
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ईरान और भारत

सदियों से चले आ रहे परस्पर सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों के अलावा ईरान भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुंचने का रास्ता भी मुहैया कराता है. इसलिए ईरान से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाये जाने की खबर भारत के लिए भी उत्साहवर्द्धक है. उम्मीद है कि अब भारत न सिर्फ कम दाम और सहूलियत के साथ कच्चे […]

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सदियों से चले आ रहे परस्पर सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों के अलावा ईरान भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुंचने का रास्ता भी मुहैया कराता है. इसलिए ईरान से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाये जाने की खबर भारत के लिए भी उत्साहवर्द्धक है. उम्मीद है कि अब भारत न सिर्फ कम दाम और सहूलियत के साथ कच्चे तेल का आयात कर सकेगा, बल्कि ज्यादा वाणिज्यिक मौके भी मिलेंगे. दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित गैस पाइपलाइन परियोजना के भी गति पकड़ने के आसार हैं.

भारतीय मदद से विकसित किये जा रहे चाबहार बंदरगाह और फरजाद बी गैस क्षेत्र के काम प्रतिबंधों के कारण बहुत धीमी गति से चल रहे थे. दोनों देशों के बीच मौजूदा कारोबार करीब 15 बिलियन डॉलर मूल्य का है, लेकिन भारत से ईरान को कुल निर्यात पांच बिलियन डॉलर से भी कम है. अफगानिस्तान में भारतीय हितों के लिए भी ईरान बहुत महत्वपूर्ण है. चाबहार बंदरगाह के चालू हो जाने से समुद्र तक अफगानिस्तान की पहुंच आसान हो जायेगी. समुद्री मार्ग के लिए अभी उसे पाकिस्तान पर निर्भर रहना पड़ता है.

प्रतिबंधों के दौरान भी भारत ईरान से तेल का आयात करता रहा था, जिसका भुगतान रुपये में किया जाता था, लेकिन विभिन्न ईरानी कंपनियों के साथ लेन-देन में बाधाएं थी. भारत पर ईरान का लगभग 6.5 बिलियन डॉलर बकाया है, जिसका भुगतान नहीं हो पा रहा था. पिछले साल ईरान से प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया की शुरुआत के साथ ही दोनों देश भावी स्थितियों की तैयारी के लिए एक-दूसरे के संपर्क में थे.

रूस के उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी की मुलाकात भी हुई थी. हालांकि, नयी परिस्थितियों में भारत के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं. प्रतिबंध हटाये जाने से ईरान के सामने भी विकल्प बढ़े हैं तथा अन्य देश भी उसके साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने की कोशिश करेंगे. विभिन्न भू-राजनीतिक कारणों से ईरान जैसे संसाधन-संपन्न देश में अमेरिका और यूरोपीय देशों की मौजूदगी सीमित रही है.

अब ये देश भी वहां बेहतर अवसर की संभावना देख रहे हैं. मध्य-पूर्व के हिंसक उथल-पुथल के कारण सऊदी अरब और ईरान में बढ़ते तनाव भी भारतीय हितों पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं. हालांकि ऐसे कारक ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों को गति देते हैं. उम्मीद की जा सकती है कि भारत-ईरान के ठोस संबंध नयी परिस्थितियों में और अधिक प्रगाढ़ होंगे और दोनों देशों के बीच नये क्षेत्रों में परस्पर सहयोग के रास्ते खुलेंगे.

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