खेल प्रतिभाओं की तलाश करनी होगी

Published at :29 Nov 2013 3:32 AM (IST)
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खेल प्रतिभाओं की तलाश करनी होगी

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करनेवालों को नौकरी दी जायेगी. पहले भी झारखंड में ऐसी घोषणाएं हुई हैं. लेकिन, अगर दो-तीन खिलाड़ियों को छोड़ दें, तो राष्ट्रीय टीम में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिल पायी है. यही कारण है कि अब […]

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करनेवालों को नौकरी दी जायेगी. पहले भी झारखंड में ऐसी घोषणाएं हुई हैं. लेकिन, अगर दो-तीन खिलाड़ियों को छोड़ दें, तो राष्ट्रीय टीम में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिल पायी है. यही कारण है कि अब झारखंड के कई खिलाड़ी दूसरे राज्यों या अन्य टीमों से खेलते हैं. खास कर हॉकी में.

खिलाड़ियों का झुकाव रेलवे या फिर सेना की टीम की ओर हो रहा है. राज्य को टीम बनाने के लिए खिलाड़ी नहीं मिलते. इतिहास बताता है कि इस राज्य में खेल या खिलाड़ियों के लिए बहुत कुछ नहीं किया जाता. हाल के दिनों में कुछ खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि जरूर मिली है. खास कर राष्ट्रीय खेल में पदक जीतनेवालों को. हाल में रांची में जूनियर सैफ खेल का आयोजन हुआ. इसमें दुख की बात यह रही कि झारखंड का एक भी खिलाड़ी नहीं था. किसी भी खिलाड़ी ने क्वालीफाइ ही नहीं किया था. राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता हो रही हो और इसमें राज्य का एक भी खिलाड़ी नहीं हो, तो प्रतियोगिता का आकर्षण कम हो जाता है.

ऐसा क्यों हुआ, यह जानने का किसी ने प्रयास नहीं किया. ऐसी बात नहीं है कि झारखंड के खिलाड़ियों में प्रतिभा नहीं है, दम नहीं है. सब कुछ है, पर उन्हें तैयार करने की, निखारने की राज्य में नीति नहीं है. पूरे राज्य में सिर्फ एक जिले में खेल पदाधिकारी हैं. अकेले वे क्या कर लेंगे? अगर खेल प्रतिभाओं को खोजनेवाली संस्थाएं काम नहीं करें, तो खिलाड़ी कैसे सामने आयेंगे? सच तो यह है कि झारखंड की प्रतिभाएं गांवों में ही दम तोड़ दे रही हैं. कुछ भाग्यशाली प्रतिभाओं को ही मौका मिल पाता है. बेहतर होगा कि राज्य सरकार प्रतिभा खोज अभियान चलाये.

ऐसा करने पर ही अच्छे खिलाड़ी बाहर आयेंगे और देश के लिए खेलेंगे. अगर खिलाड़ी ही पैदा नहीं होंगे, तो झारखंड सरकार की नौकरी देने की योजना धरी की धरी रह जायेगी. स्कूलों में गेम टीचर से लेकर खेल विभाग में बड़े अधिकारियों तक की नियुक्ति करनी होगी, उन्हें काम करना होगा. खेल सुविधाओं को बढ़ाना होगा. राज्य में एक नहीं, कई दीपिका कुमारी-अशुंता लकड़ा तैयार करना होगा, ताकि युवा पीढ़ी का मनोबल बढ़े.

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