ट्रैफिक जाम के लिए हम सभी जिम्मेदार

पहले कहा जाता था कि त्योहारों के समय अधिक भीड़-भाड़ से ट्रैफिक जाम हो जाता था. पर अब तो आम दिनों में सड़क जाम होना सामान्य हो गया है. सच पूछिए तो इस जाम के लिए व्यवस्था नहीं, हम सभी की लापरवाही जिम्मेदार है. पैदल चलने वालों का तो भगवान ही मालिक है. कौन किस […]
पहले कहा जाता था कि त्योहारों के समय अधिक भीड़-भाड़ से ट्रैफिक जाम हो जाता था. पर अब तो आम दिनों में सड़क जाम होना सामान्य हो गया है. सच पूछिए तो इस जाम के लिए व्यवस्था नहीं, हम सभी की लापरवाही जिम्मेदार है.
पैदल चलने वालों का तो भगवान ही मालिक है. कौन किस दिशा से आकर चोट पहुंचा दे, कहना मुश्किल है. यही नहीं, हम भी बीच सड़क पर खड़े होकर ऑटो या बस को रुकवाते हैं और फिर बड़ी शान से उसमें चढ़ते हैं. यह नहीं देखते कि इससे पीछे की गाड़ियां रूक जाती हैं. हमारी लापरवाही का खामियाजा दूसरे को भुगतना पड़ता है. विडंबना यह है कि जब यहां के लोग राज्य के बाहर के शहरों में जाते हैं, तो ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं. लेकिन रांची या राज्य के दूसरे शहरों में लोग धड़ल्ले से मोबाइल पर बात करते हुए मिल जायेंगे.
किशन अग्रवाल, रांची.
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