जारी हैं जहर घोलने की साजिशें

Published at :05 Nov 2013 5:10 AM (IST)
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जारी हैं जहर घोलने की साजिशें

इसे एक विचित्र संयोग ही कहा जायेगा कि जहां एक तरफ भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल पर दावेदारी की सियासत मीडिया में सुर्खियां बटोर रही थी, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पटेल की विरासत को बचा पाने में वहां की राजनीति और शासन व्यवस्था एक बार फिर से नाकाम […]

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इसे एक विचित्र संयोग ही कहा जायेगा कि जहां एक तरफ भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल पर दावेदारी की सियासत मीडिया में सुर्खियां बटोर रही थी, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पटेल की विरासत को बचा पाने में वहां की राजनीति और शासन व्यवस्था एक बार फिर से नाकाम साबित हो रही थी.

मुजफ्फरनगर में बीते सितंबर में भड़के सांप्रदायिक दंगों के मुश्किल से दो महीने बाद जिस तरह से तीन युवकों की मौत के बाद वहां सांप्रदायिक तनाव चरम पर जाता दिख रहा है, वह हालात पर काबू पाने की मौजूदा उत्तर प्रदेश सरकार की क्षमता और इच्छाशक्ति पर सवालिया निशान लगा रहा है.

मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगों के पहले दौर के लिए राज्य सरकार के लचर रवैये को जिम्मेवार ठहराया गया था, लेकिन गलती से सबक सीखने की जगह, उत्तर प्रदेश सरकार उसे दोहराती नजर रही है. मुजफ्फरनगर दंगों के पिछले दौर के पीछे सामुदायिक पंचायतों का अहम हाथ बताया गया था, लेकिन ऐसी पंचायतें वहां अभी भी हो रही हैं, जो तनाव को बढ़ाने का काम रह रही हैं.

यह उस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जहां दशकों से हिंदू और मुसलमान, धार्मिक पहचान को अपनी किसान पहचान में एकमएक करके, अमन और चैन के साथ रह रहे थे. इतना तय है कि मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक तनाव की लपटों को हवा देने के पीछे स्वार्थी राजनीतिक शक्तियां काम कर रही हैं.

सवाल यह है कि क्या सरकार अपने फैसले राजनीतिक शक्ति के तौर पर कर सकती है? शासन का सिद्घांत कहता है कि सरकार को हर तरह के पक्षपात से ऊपर उठ कर सिर्फ समाज के पक्ष में काम करना चाहिए. जब सरकार के फैसले में राजनीतिक नफानुकसान का गणित काम करने लगता है, तब सही और गलत का विवेक, न्याय का नैतिक दायित्व दरक जाता है.

इन दंगों के पीछे इस न्यायविवेक की कमी का ही हाथ माना जा सकता है. नजदीक आते चुनावों के बीच सरकारों को सामाजिक सौहार्द में जहर घोलने की कोशिशों के प्रति पूरी तरह से सतर्क होना पड़ेगा. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मुजफ्फरनगर और विकराल रूप लेकर दूसरी जगहों पर भी प्रकट हो सकता है.

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