जनता की परवाह किसे है?

मैं आपके सम्मानित दैनिक के माध्यम से झारखंड के मुख्यमंत्री का ध्यान इस बात पर दिलाना चाहता हूं कि राज्य में हर महकमे की कार्य संस्कृति बद से बदतर होती जा रही है. बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी चीजें तो आज के इनसान की सबसे बड़ी जरूरतें हैं. उन्हें भी दुरुस्त नहीं रख पा […]
मैं आपके सम्मानित दैनिक के माध्यम से झारखंड के मुख्यमंत्री का ध्यान इस बात पर दिलाना चाहता हूं कि राज्य में हर महकमे की कार्य संस्कृति बद से बदतर होती जा रही है. बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी चीजें तो आज के इनसान की सबसे बड़ी जरूरतें हैं. उन्हें भी दुरुस्त नहीं रख पा रही है सरकार. उदाहरण के तौर पर लौह नगरी के व्यस्ततम चौराहे, मानगो चौक को ही लें.
अभी दशहरा से पहले यहां सड़क निर्माण हुआ था और अब उसी सड़क की ऐसी हालत हो गयी है मानो गिट्टी का ढेर हो. यहां अधिकारियों को कोई भय नहीं मानो मंत्री से उसकी सीधी सेटिंग है. जन प्रतिनिधि को भी दोबारा ना चुने जाने का भय नहीं. साल भर में इतना बना लेते हैं कि सारा चुनाव खर्च सूद सहित निकल जाता है और जीवनर्पयत पेंशन अलग से. क्या ऐसे ही होगा देश और राज्य का विकास? नवीन कुमार सिन्हा, जमशेदपुर
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