तेल के मूल्य में वृद्धि से न कटे जेब

Published at :01 Nov 2013 3:22 AM (IST)
विज्ञापन
तेल के मूल्य में वृद्धि से न कटे जेब

बेलगाम महंगाई के बीच किरिट पारेख समिति ने सरकार को डीजल की कीमत में पांच रुपये और केरोसिन की कीमत में चार रुपये प्रति लीटर वृद्धि करने का सुझाव दिया है. समिति की सिफारिशों में रसोई गैस की कीमत में प्रति सिलिंडर 250 रुपये का इजाफा करने के साथ-साथ एक परिवार को सालभर में अनुदानित […]

विज्ञापन

बेलगाम महंगाई के बीच किरिट पारेख समिति ने सरकार को डीजल की कीमत में पांच रुपये और केरोसिन की कीमत में चार रुपये प्रति लीटर वृद्धि करने का सुझाव दिया है. समिति की सिफारिशों में रसोई गैस की कीमत में प्रति सिलिंडर 250 रुपये का इजाफा करने के साथ-साथ एक परिवार को सालभर में अनुदानित मूल्य पर नौ की जगह छह सिलिंडर देने का प्रस्ताव भी शामिल है. पेट्रोलियम पदार्थो पर सब्सिडी घटाने का तर्क बढ़ते राजकोषीय घाटे से निकलता है.

भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल-आयातक देश है. देश के कुल ईंधन उपभोग में 40 फीसदी हिस्सा डीजल का है. अगर सरकार किरिट पारेख समिति की सिफारिशें मान लेती है, तो इस साल के 1 नवंबर से अगले साल के 31 मार्च के बीच वह डीजल के मद में दी जानेवाली सब्सिडी में 16 अरब रुपये की बचत कर लेगी. चालू वित्त वर्ष में सरकार ने डीजल, केरोसिन और रसोई गैस पर सब्सिडी के तौर पर अस्सी हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा था. लेकिन, रुपये की गिरती कीमत के कारण चालू वित्त वर्ष में यह खर्च एक लाख 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और आगामी लोकसभा चुनाव की आहटों के बीच ज्यादा संभावना इसी बात की है कि सरकार फिलहाल किरिट पारेख समिति के सुझाव न माने. लेकिन, उसे देर-सबेर डीजल-केरोसिन और रसोई गैस पर जारी सब्सिडी को कम करने का तर्क तो हासिल हो ही गया है. पेट्रोलियम पदार्थो के मूल्य में वृद्धि के द्वारा राजकोषीय घाटे को कम करने का लक्ष्य वित्तीय तर्क के हिसाब से ठीक हो सकता है, लेकिन यह भी तय है कि इससे पहले से ही महंगाई के भार तले पिसती आम आदमी की जेब थोड़ी और कटेगी. सब्सिडी घटाते वक्त यह जरूर देखा जाना चाहिए कि बढ़ी हुई महंगाई का बोझ देश के हर नागरिक पर समान रूप से न पड़े. देश की 80 फीसदी आबादी की क्रय शक्ति, ऊपर की 20 प्रतिशत आबादी से काफी कम है, और उनके लिए रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की कीमत में में चार-पांच रुपये का इजाफा काफी महत्व रखता है. सरकार जरूर अपने बही-खाते के बारे में फिक्र करे, लेकिन उसे देश की अस्सी फीसदी आबादी के डांवाडोल बजट के लिए भी फिक्रमंद होना चाहिए.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola