देश को बनाने की है जरूरत

Updated at : 28 Oct 2015 12:33 AM (IST)
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देश को बनाने की है जरूरत

वर्तमान समय में देश की राजनीति का स्तर इतना अधिक गिरता जा रहा है कि राजनेताओं को देश को बांटने के सिवाय कुछ नजर ही नहीं आ रहा है. कभी वे अलग राज्य के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, तो कभी धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की साजिश की जा रही है. […]

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वर्तमान समय में देश की राजनीति का स्तर इतना अधिक गिरता जा रहा है कि राजनेताओं को देश को बांटने के सिवाय कुछ नजर ही नहीं आ रहा है. कभी वे अलग राज्य के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, तो कभी धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की साजिश की जा रही है.
जिस देश के लोग रात में बिना खाये ही सो रहे हों, ज्यादातर बच्चे कुपोषण के शिकार हों, उस देश में विखंडन की राजनीति करना कहां तक उचित है? आज से सात सौ साल पहले यूरोप जिस अंधविश्वास, दंभ एवं धार्मिक बरबरता के युग में जी रहा था, उस युग को आज अपने ही देश में घसीटने की कोशिश की जा रही है.
जिस प्रकार की गालियों से अभी तक हम त्रस्त थे, आज उन्हीं गालियों का प्रयोग हमारे देश में किया जा रहा है. धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर झगड़े रहो रहे हैं. आज जरूरत देश को बिगाड़ने की नहीं, बल्कि उसे बनाने की है.
– संघर्ष यादव गोलू, ई-मेल से
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