यूएन में सुधार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Sep 2015 5:36 AM (IST)
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संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में सुधार की बातें अब तक महज बयानों तक सीमित थीं, पर अब महासभा ने सदस्य देशों के बीच बहस-मुबाहिसा का फैसला लिया है. इस पहल को लगभग 200 देशों का समर्थन प्राप्त है. मंगलवार से शुरू महासभा की बैठक में सदस्य देश लिखित रूप में अपनी राय रख सकेंगे. […]
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संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में सुधार की बातें अब तक महज बयानों तक सीमित थीं, पर अब महासभा ने सदस्य देशों के बीच बहस-मुबाहिसा का फैसला लिया है. इस पहल को लगभग 200 देशों का समर्थन प्राप्त है. मंगलवार से शुरू महासभा की बैठक में सदस्य देश लिखित रूप में अपनी राय रख सकेंगे. सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए लंबे समय से प्रयासरत भारत ने इस निर्णय का स्वागत किया है. इस महत्वपूर्ण संस्था की सदस्यता के लिए भारत एक मजबूत दावेदार है और उसे अनेक देशों का समर्थन प्राप्त है.
पांच मौजूदा स्थायी सदस्यों ने भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की दावेदारी पर मुहर लगायी है, पर इन देशों ने सुधार की कोशिशों में बहुधा अड़चनें भी पैदा की हैं. संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष निर्णायक इकाई सुरक्षा परिषद में फिलहाल पांच स्थायी सदस्यों- चीन, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस- के अतिरिक्त 15 अस्थायी सदस्य हैं.
सदस्य देशों के बीच बहस के बाद अंतिम प्रस्ताव पर महासभा निर्णय लेगी. इसके पारित होने के लिए दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी. हालांकि इस प्रक्रिया के पूरा होने में समय लग सकता है, पर संयुक्त राष्ट्र को अधिक लोकतांत्रिक और प्रातिनिधिक बनाने की कोशिशों को इससे बल मिलेगा. अभी चार देशों- भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान- का समूह सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के ठोस दावेदार हैं.
इनके अलावा नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और सेनेगल भी अफ्रीकी महादेश की ओर से अपना दावा करते रहे हैं. दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, तुर्की और इंडोनेशिया भी आनेवाले समय में उम्मीदवार बन सकते हैं. मौजूदा निर्णय भारत समेत कुछ अन्य देशों की गंभीर कूटनीतिक कोशिशों का नतीजा है, लेकिन सदस्यता के इच्छुक दावेदारों को समर्थन जुटाने के लिए लगातार प्रयत्न करना होगा.
जहां पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत, इथियोपिया और नाइजीरिया संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सबसे अधिक योगदान देते हैं, वहीं इस सेना में सबसे अधिक आर्थिक योगदान अमेरिका, जापान, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और चीन का है. इन देशों की राय अंतिम निर्णय में बहुत महत्वपूर्ण होगी.
आमसभा में मतदान में वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य की भी अहम भूमिका होगी. ऐसे में भारत को अधिकाधिक समर्थन जुटाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों के साथ वैश्विक राजनीतिक वातावरण का संज्ञान लेते हुए संभावित विरोधियों को भी भरोसे में लेने की कोशिश करनी होगी.
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