रस्म अदायगी से हिंदी का भला नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Sep 2015 1:21 AM (IST)
विज्ञापन

सितंबर के महीने में हिंदी दिवस को लेकर सरकारी स्तर पर तामझाम खूब होते हैं. सरकारी कार्यालयों से लेकर निजी संस्थानों में हिंदी के गुणगान व बखान की तैयारियां हो रही हैं. साल भर दूसरी भाषाओं का गुणगान करनेवाले और समय की जरूरत बता कर मातृभाषा से मोहभंग करानेवाले भी हिंदी के बखान करने की […]
विज्ञापन
सितंबर के महीने में हिंदी दिवस को लेकर सरकारी स्तर पर तामझाम खूब होते हैं. सरकारी कार्यालयों से लेकर निजी संस्थानों में हिंदी के गुणगान व बखान की तैयारियां हो रही हैं.
साल भर दूसरी भाषाओं का गुणगान करनेवाले और समय की जरूरत बता कर मातृभाषा से मोहभंग करानेवाले भी हिंदी के बखान करने की तैयारों में जुटे हैं. हिंदी के स्थान पर अंगरेजी शब्दों का बेधड़क उपयोग करनेवाले टेलीविजन से लेकर समाचार पत्रों तक में हिंदी दिवस को लेकर विशेष आयोजन किये जा रहे हैं. दरअसल, हिंदी के गौण होने की वजह हिंदी के ही वे ठेकेदार हैं, जो साल भर की कुंभकर्णी नींद के बाद सितंबर महीने में जागते हैं.
सितंबर में हिंदी को ठीक उसी तरह याद किया जाता है, जैसे पितृपक्ष में पूर्वजों को. हिंदी को समृद्ध बनाने की रस्म अदायगी से नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करने से उसका कल्याण होगा.
– सौरभ पाठक, बुंडू
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




