डर के साये में कब तक जियेंगे हम?

Published at :28 Aug 2015 11:14 PM (IST)
विज्ञापन
डर के साये में कब तक जियेंगे हम?

देश में महिलाओं, युवतियों और बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है.देश की राजधानी दिल्ली में हुए 16 दिसंबर के हादसे की आवाज आज तक हमारे कानों में गूंज रही है. फिर भी हम रोजाना देश के किसी न किसी कोने में यौन उत्पीड़न के मामले के बारे में […]

विज्ञापन
देश में महिलाओं, युवतियों और बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है.देश की राजधानी दिल्ली में हुए 16 दिसंबर के हादसे की आवाज आज तक हमारे कानों में गूंज रही है. फिर भी हम रोजाना देश के किसी न किसी कोने में यौन उत्पीड़न के मामले के बारे में देखते, सुनते और पढ़ते हैं.
आज हम यह सोचने पर मजबूर हो गये हैं कि आखिर वह दिन कब आयेगा, जब हम निर्भीक होकर समाज में अपना जीवन बसर करेंगे? आज देश में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में 61 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. यदि सरकार ने इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया, तो स्थिति भयावह होने में देर नहीं लगेगी.
फिर कोई दामिनी वहशियों के हवस की शिकार होगी तो देश में और आक्रोश फैलेगा. इस प्रकार के हादसों के पहले ही उपाय कर लिये जाने चाहिए.
मनोरमा सिंह, जमशेदपुर
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola