अपराधियों का चेहरा भी तो बेनकाब हो

Published at :28 Aug 2015 11:13 PM (IST)
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अपराधियों का चेहरा भी तो बेनकाब हो

जब किसी सामाजिक कार्यकर्ता, वीवीआइपी आदमी, सेठ, नेता, साधु, संत आदि को पुलिस गिरफ्तार करती है, तो मीडिया चटखारे लेकर उसका प्रसारण करती है.देश-दुनिया के लोग उसमें दिलचस्पी भी लेते हैं. पूरी दुनिया में ऐसे दोहरे चरित्रवाले लोगों की थू-थू होती है और पुलिस-प्रशासन को वाहवाही मिलती है. ऐसा इसलिए होता है कि दोहरे चरित्रवाले […]

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जब किसी सामाजिक कार्यकर्ता, वीवीआइपी आदमी, सेठ, नेता, साधु, संत आदि को पुलिस गिरफ्तार करती है, तो मीडिया चटखारे लेकर उसका प्रसारण करती है.देश-दुनिया के लोग उसमें दिलचस्पी भी लेते हैं. पूरी दुनिया में ऐसे दोहरे चरित्रवाले लोगों की थू-थू होती है और पुलिस-प्रशासन को वाहवाही मिलती है.
ऐसा इसलिए होता है कि दोहरे चरित्रवाले आदमी की व्यक्तिगत छवि सार्वजनिक होती है और लोगों को उस पर भरोसा होता है. भरोसा टूटने पर उसकी सार्वजनिक तौर पर पूरे देश में बेईज्जती होती है. ठीक इसके उलट यदि कोई अपराधी, आतंकवादी या उग्रवादी को पुलिस गिरफ्तार करती है, तो उसके चेहरे को नकाब से ढंक दिया जाता है.
अपराधी चाहे जैसा भी हो, है तो अपराधी ही. ऐसे में एक के चेहरे को सार्वजनिक करना और दूसरे के चेहरे को छिपाना कितना उचित है?
रतनदास महंत सखी, जमशेदपुर
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