फिलीपींस को अमेरिकी सुरक्षा कवच!

Published at :07 Oct 2013 3:03 AM (IST)
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फिलीपींस को अमेरिकी सुरक्षा कवच!

।। डॉ गौरीशंकर राजहंस ।। पूर्व सांसद एवं राजदूत अमेरिका और चीन दक्षिण–पूर्वी एशियाई देशों में भिड़ सकते हैं. इसके दुखद परिणाम एशिया के सभी देशों को भुगतने होंगे. अब देखना है कि क्या अमेरिका फिलीपींस को पहले की तरह चीन के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान करेगा? चीन ‘साउथ चाइना सी’ और ‘ईस्ट चाइना सी’ […]

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।। डॉ गौरीशंकर राजहंस ।।

पूर्व सांसद एवं राजदूत

अमेरिका और चीन दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में भिड़ सकते हैं. इसके दुखद परिणाम एशिया के सभी देशों को भुगतने होंगे. अब देखना है कि क्या अमेरिका फिलीपींस को पहले की तरह चीन के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान करेगा?

चीन साउथ चाइना सी और ईस्ट चाइना सी में अपनी दादागीरी जारी रखे हुए है. ईस्ट चाइना सी में तो वह आये दिन जापान से उलझता रहता है. परंतु साउथ चाइना सी में वह फिलीपींस, वियतनाम, ब्रुनई, मलयेशिया और ताइवान के उन दावों को मानने से इनकार कर रहा है कि इनके समुद्र तटों पर जो छोटे द्वीप हैं, जिनमें तेल और गैस की अपार संभावनाएं हैं, उनके मालिक दक्षिणपूर्व एशिया के ये देश हैं. चीन का कहना है कि इनका असल मालिक वह है.

अमेरिका ने और आसियान देशों ने चीन को समझाया कि वह इन देशों के प्रतिनिधियों से मिल कर बात करे और कोई उपाय निकाले. परंतु, चीन ने दो टूक कह दिया है कि वह बात नहीं करेगा. चीन का मानना है कि साउथ चाइना सी में आनेवाले सारे द्वीपों का मालिक वही है. यदि किसी अन्य देश ने इन द्वीपों से तेल और गैस निकालने की कोशिश की तो उसे वह मुंहतोड़ जवाब देगा. इस मामले में वह वियतनाम से कई बार उलझ भी चुका है.

कभी अमेरिका और वियतनाम एक दूसरे के शत्रु थे. परंतु चीन के बढ़ते खतरे को देख कर वियतनाम ने अमेरिका से दोस्ती कर ली. और अमेरिका ने वियतनाम की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वियतनाम में एक मजबूत नौसैनिक बेड़े की स्थापना कर दी. चीन को यह नापसंद है.

उसने बारबार चेतावनी दी है कि अमेरिका वियतनाम से बेड़ा हटा ले. चीन का वियतनाम से झगड़ा ही रहा है. इसी बीच खबर आयी कि चीन फिलीपींस के समुद्री तट सूबिक की खाड़ी पर अपना कब्जा जमाने का प्रयास कर रहा है. फिलीपींस के इस समुद्री तट पर बेहद उम्दा किस्म की मछलियां पायी जाती हैं.

हाल तक फिलीपींस इससे अच्छी आमदनी कर रहा था. चीन ने हाल में लड़ाकू समुद्री जहाज भेज कर यह कह दिया है कि इस क्षेत्र पर केवल चीन का आधिपत्य है और फिलीपींस इस समुद्री तट से कोई मछली नहीं पकड़ सकता. चीन ने फिलिपींस को यह चेतावनी भी दी है कि फिलीपींस के समुद्री तट पर जो छोटे द्वीप हैं, उन सबका मालिक सिर्फ वह है. फिलीपींस इन द्वीपों से तेल और गैस निकालने का प्रयास करे अन्यथा उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा.

चीन की दादागिरी से फिलीपींस डर गया है और वह भयभीत है कि चीन कभी भी कुछ भी कर सकता है. इसी कारण फिलीपींस ने घबरा कर चीन के खिलाफ अमेरिका से सुरक्षा कवच मांगा है. यहां यह बात जानना दिलचस्प है कि वर्षो तक फिलीपींस एक तरह से अमेरिका का उपनिवेश था.

परंतु 1991 में फिलीपींस ने अपने को अमेरिका के साये से पूरी तरह से मुक्त कर लिया. सूबिक की खाड़ी में अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक अड्डा था. फिलीपींस ने अमेरिकी नौसैनिक अड्डे को समाप्त कर दिया और अमेरिका के लड़ाकू जहाज सदा के लिए फिलीपींस छोड़ कर चले गये. क्लार्क एयरबेस में भी सैकड़ों अमेरिकी लड़ाकू विमान थे. उन्हें भी फिलीपींस ने शीघ्रातिशीघ्र वहां से जाने के लिए बाध्य कर दिया.

अब फिलीपींस ने अमेरिका से सुरक्षा के तहत यह प्रस्ताव किया है कि वह पहले की तरह ही सूबिक की खाड़ी में अपने नौसैनिक अड्डे स्थापित करे, जहां अमेरिकी लड़ाकू जहाज चीन के लड़ाकू जहाजों का मुकाबला कर सकें. उसने यह भी प्रस्ताव रखा है कि अमेरिका उसकी पुरानी गलतियों को माफ करे और फिर से क्लार्क बेस पर हवाई अड्डा बना ले, जिससे सिर्फ फिलीपींस, बल्कि अन्य दक्षिणपूर्व एशियाई देश भी चीन का मुकाबला कर सकेंगे.

अमेरिका पुरानी कटुता को भूल कर सुरक्षा के मामले में फिलीपींस की हर तरह की मदद को तैयार है. वह फिलीपींस में एक मजबूत समुद्री लड़ाकू जहाजों का बेड़ा बनायेगा और क्लार्क एयरबेस पर लड़ाकू हवाई जहाज तैनात रखेगा. परंतु अमेरिका में यह चर्चा है कि यदि उसने अफगान की तरह एक अन्य एशियाई देश फिलीपींस में प्रत्यक्ष या परोक्ष युद्ध शुरू किया, तो इसका उसकी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.

परंतु, राष्ट्रपति ओबामा का कहना है कि यदि अमेरिका मुसीबत की इस घड़ी में दक्षिणपूर्व एशिया और पूर्व एशिया के अपने मित्र देशों के साथ ख़ड़ा नहीं होता है, तो वह संसार में दूसरे या तीसरे दज्रे का देश बन जायेगा. उधर चीन कह रहा है कि अमेरिका उसे जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक घेर रहा है और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों को उसके खिलाफ भड़का रहा है.

वह अमेरिका की सीनाजोरी नहीं सहेगा. मामला गंभीर हो गया है और किसी भी दिन अमेरिका और चीन दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में भिड़ सकते हैं. इसके दुखद परिणाम एशिया के सभी देशों को भुगतने होंगे. अब देखना है कि क्या अमेरिका फिलीपींस को पहले की तरह चीन के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान करेगा?

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