सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं

Published at :07 Oct 2013 2:44 AM (IST)
विज्ञापन
सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में 13 सितंबर को अदालत का फैसला आया. क्या इससे पहले भी बलात्कार मामले में न्याय की गति इतनी ही तीव्र थी? क्या ऐसे सभी मामलों में सजा–ए–मौत का ही हुक्म होता है? दामिनी मामले ने देशवासियों को क्यों झकझोर दिया? मीडियावाले क्यों पल–पल की खबरें जुटाते रहे? पुलिस क्यों बारीकी […]

विज्ञापन

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में 13 सितंबर को अदालत का फैसला आया. क्या इससे पहले भी बलात्कार मामले में न्याय की गति इतनी ही तीव्र थी? क्या ऐसे सभी मामलों में सजामौत का ही हुक्म होता है? दामिनी मामले ने देशवासियों को क्यों झकझोर दिया? मीडियावाले क्यों पलपल की खबरें जुटाते रहे?

पुलिस क्यों बारीकी से जांच करती रही? जवाब मिलना बाकी है. गत 13 सितंबर को साकेत कोर्ट का फैसला, आनेवाले दिनों में भी दोहराया जायेगा या समाज को इससे कोई संदेश मिलेगा, ऐसा नहीं है.

सजा का हकदार तो समाज है, जो ऐसे अपराध रोकने में अक्षम है. जो हर मामले को सड़क से संसद तक नहीं ले जाता. आगे साकेत की सजा बरकरार रहेगी या नहीं, समय ही बतायेगा. उपचार और इलाज के लंबे दौर में कौन गुनहगार हो जाये, मालूम नहीं.

एमके मिश्र, रांची

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola