पूजा के बहाने अतीत की यादें

।। अनुज सिन्हा ।। वरिष्ठ संपादक प्रभात खबर विजयादशमी के दिन मां सुबह से ही पकवान बनाने लग जाती थी. तैयारी इसलिए भी ज्यादा होती थी, क्योंकि उस दिन मुहल्ले के लोग शाम को एक–दूसरे के घर आते–जाते. चार–छह माह भले ही मुलाकात न हो, पर होली–दशहरा में एक–दूसरे के घर जाना ही था. अगर […]
।। अनुज सिन्हा ।।
वरिष्ठ संपादक
प्रभात खबर
विजयादशमी के दिन मां सुबह से ही पकवान बनाने लग जाती थी. तैयारी इसलिए भी ज्यादा होती थी, क्योंकि उस दिन मुहल्ले के लोग शाम को एक–दूसरे के घर आते–जाते. चार–छह माह भले ही मुलाकात न हो, पर होली–दशहरा में एक–दूसरे के घर जाना ही था. अगर किसी के घर नहीं गये, तो बाद में मिलने पर वो पूछ बैठते कि इस बार आये नहीं?
हाल में, घर में कुछ पुराने कागजात खोज रहा था. उसी दौरान एक पुरानी तसवीर मिल गयी. संभवत: 1973-74 की होगी. उसमें हम सभी भाई–बहन और मां–पिता एकसाथ हैं. देखते ही याद आया कि यह तसवीर हजारीबाग के आरके स्टूडियो में नवमी या दशमी (दशहरा) के दिन उस समय खिंचवायी गयी थी, जब पूरे परिवार के साथ हमलोग मेला घूमने गये थे.
तसवीर को कुछ देर देखता रहा.. सभी भाइयों के शर्ट व पैंट के रंग–डिजाइन एक जैसे. एक ही थान के कपड़े से बनवाये हुए. अगर मेले में कोई इधर–उधर हो जाये, तो कपड़े देख कर परिवार के लोग खोज सकते थे. कई सवाल मन में उठने लगे. एकाएक 40 साल पहले जा कर आज से तुलना करने लगा.
कैसे स्कूल में पूजा की छुट्टी का इंतजार किया करता था? नये कपड़े पहन कर मूर्ति देखने जायेंगे, पूजा करेंगे, मुहल्ले में भी घूमेंगे. दुर्गापूजा हो और नया कपड़ा न हो, यह संभव नहीं था. इसका तो महीनों से इंतजार करते थे. उस दिन सबसे ज्यादा खुश रहता, जिस दिन मां के साथ दर्जी के पास कपड़े का नाप देने जाते. दर्जी जिस दिन बुलाता, उसके एक दिन पहले से ही जा कर पूछते– कपड़े बन गये या नही? दर्जी पर दबाव बनाते थे. वह उत्साह–खुशी का क्षण होता था.
विजयादशमी के दिन मां तो सुबह से ही पकवान बनाने में लग जाती थी. तैयारी इसलिए भी ज्यादा होती थी, क्योंकि उस दिन मुहल्ले के लोग शाम को एक–दूसरे के घर आते–जाते. यही परंपरा थी.
चार–छह माह भले ही मुलाकात न हो, पर होली–दशहरा में एक–दूसरे के घर जाना ही था. अगर किसी के घर नहीं गये, तो बाद में मिलने पर वो पूछ बैठते कि इस बार आये नहीं? ऐसा था मेल–मिलाप, ऐसे थे संबंध. संस्कार पर जोर दिया जाता था. नये कपड़े पहन कर पहले भगवान को, फिर दादा–दादी, मां–पिता और बड़ों को प्रणाम करना होता था. पड़ोसी के घर जाते, वहां भी पैर छू कर प्रणाम करते और आशीर्वाद लेते.
फिर पूरा परिवार मूर्ति विसजर्न देखने चला जाता था. एक उमंग होती थी. होली–दुर्गापूजा में पूरा परिवार एक साथ जमा होता था. मिल कर खुशियां मनाते थे. जब तक बच्चे थे, ऐसा ही चलता रहा. जब थोड़ा बड़ा हुआ, तो दोस्तों के साथ घूमने लगा. लेकिन अब समय बहुत बदल गया है.
समाज में दूरियां बढ़ गयी हैं. अपनापन कम हो गया है. पूजा के दिन पड़ोसी के घर जाने और आशीर्वाद लेने की परंपरा लगभग खत्म हो गयी है. सब अपने में जी रहे हैं. लाखों की लागत से बड़े–बड़े और आकर्षक पंडाल बन रहे हैं. इसे देखने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ रही है. ट्रैफिक जाम के कारण सड़कों पर चलना मुश्किल होता है. बच्चे जब जिद करते हैं, तो देर रात एक बार पंडाल घूमने की हिम्मत जुटा पाया तो बहुत है.
जीवन व्यस्त होता जा रहा है. लोग छुट्टी मिलते ही घर में आराम करना चाहते हैं. टीवी, कंप्यूटर में बच्चों की रुचि बढ़ती जा रही है. बहुत हुआ तो पंडाल देख लिया. मूर्ति के बारे में बहुत जानकारी नहीं चाहते.
पहले दादी व मां के साथ जब पूजा पंडाल में जाते तो वे एक–एक मूर्ति के बारे में बतातीं. वहीं पर कहानी सुनाने लगतीं. बताती कि यह मूर्ति मां दुर्गा की है, जो शेर पर सवार हैं. यह महिषासुर है जिसकी छाती में मां दुर्गा ने त्रिशूल भोंका है. एक ओर भगवान गणोश हैं, दूसरी ओर बेलतरणी हैं. इतना समझा देती कि फिर किताब में पढ़ना नहीं पड़ता. अब न बच्चे ये सब सुनना चाहते हैं, न बच्चों की मां यह सब सुनाना चाहती हैं. यह बदलाव है.
पूजा में बड़े पैमाने पर बाजार ने इसका स्थान ले लिया है. नये–नये कंज्यूमर आइटम आ गये हैं. बच्चे या उनकी मां यह योजना बनाते हैं कि इस बार त्योहार (दुर्गापूजा या दीवाली) में कौन सी नयी चीज खरीदेंगे. पूजा के दौरान, एक से एक कीमती ड्रेस, नये–नये फीचरवाले मोबाइल, कार के मॉडल बाजार में दिये जाते हैं.
ध्यान पूजा की ओर कम और खरीदारी में ज्यादा होता है. सच यह है कि अब हम सभी अपनी परंपराओं और अपनी संस्कृति से कटते जा रहे हैं. इनसे जुड़ने के लिए वक्त भी नहीं निकाल पाते. यही कारण है कि समाज अब पतन की ओर जा रहा है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










