फौरी जरूरत और गैर-जरूरी बयान

दुनिया में तकरीबन 1 अरब 10 करोड़ लोगों को शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण खुले में शौच करना पड़ता है. इस तादाद में अकेले भारत से करीब 62 करोड़ लोग शामिल हैं. यानी खुले में शौच करने को बाध्य दुनिया की कुल आबादी का 59 फीसदी हिस्सा भारत में रहता है. भारत में […]
दुनिया में तकरीबन 1 अरब 10 करोड़ लोगों को शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण खुले में शौच करना पड़ता है. इस तादाद में अकेले भारत से करीब 62 करोड़ लोग शामिल हैं. यानी खुले में शौच करने को बाध्य दुनिया की कुल आबादी का 59 फीसदी हिस्सा भारत में रहता है.
भारत में पेयजल की सुविधा से वंचित लोगों की संख्या भी करीब 14 करोड़ है. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टो (विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ) में इन दो वजहों को साफ-सफाई की आदत से जोड़ते हुए डायरिया के खतरों की तरफ ध्यान दिलाया जाता है. कहा जाता है कि भारत में 10 लाख से ज्यादा शिशु डायरिया या पेट की अन्य बीमारियों से काल-कवलित होते हैं. जाहिर है, ये तथ्य दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होने को लालायित भारत के विकास की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न् लगाते हैं. विकास की नीतियों में बुनियादी सुविधाओं से वंचित भारतीयों को आगे रख कर प्राथमिकता तय करने की तैयारी नहीं दिखती.
भारत सरकार ने पेयजल और साफ-सफाई से जुड़ी सुविधाएं प्रदान करने के लिए 2008 में जीडीपी का 0.54 फीसदी खर्च किया था, तो 2010 में मात्र 0.45 फीसदी. ऐसे में जब कोई नेता यह कहे कि शौचालय बनवाना बहुत जरूरी है, तो कहा जा सकता है कि वह एक फौरी जरूरत को बहुत देरी से स्वीकार कर रहा है. वह कोई मौलिक सूझ-बूझ का परिचय नहीं दे रहा, बल्कि सहस्नब्दि विकास लक्ष्यों को पूरा करने की भारत की वचनबद्धता को दोहरा रहा है. यह बात जितनी मंत्री जयराम रमेश के लिए ठीक है, उतनी ही प्रधानमंत्री बनने को आतुर नरेंद्र मोदी के लिए भी.
सरकार का काम साफ-सफाई की सुविधा से वंचित लोगों के लिए शौचालय बनवाने में मददगार होने का है, देवालय बनवाना न तो उसके जिम्मे आता है, न ही समाज इसकी अपेक्षा रखता है. देश में शौचालय बनवाने की जरूरत को रेखांकित करने के लिए किसी नेता द्वारा देवालय बनवाने की जरूरत का जिक्र करना गैर-जरूरी बयान है. चाहे वह नेता जयराम रमेश हों, नरेंद्र मोदी या कोई और, अगर गैर-जरूरी बयान देकर समाज के किसी तबके की भावनाओं को भड़काने या उसे गोलबंद करने की कोशिश करता है, तो इससे उसकी नीयत और नीति की खोट का ही पता चलता है!
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