देश में लोकतंत्र नहीं, लूटतंत्र!

Published at :03 Oct 2013 3:50 AM (IST)
विज्ञापन
देश में लोकतंत्र नहीं, लूटतंत्र!

आज देश में लूटतंत्र है. कोई कोयला लूट रहा है, तो कोई गैस. क्रिकेट की संस्था तो लूट का पर्याय बन गयी है. न्यायपालिका की कड़ी टिप्पणी पर पहले त्यागपत्र हो जाते थे, अब चमड़ी मोटी हो जाने के कारण कोई असर नहीं दिखता. देश मे अवसाद का वातावरण है. घपलों-घोटालों से लोग तंग हैं. […]

विज्ञापन

आज देश में लूटतंत्र है. कोई कोयला लूट रहा है, तो कोई गैस. क्रिकेट की संस्था तो लूट का पर्याय बन गयी है. न्यायपालिका की कड़ी टिप्पणी पर पहले त्यागपत्र हो जाते थे, अब चमड़ी मोटी हो जाने के कारण कोई असर नहीं दिखता. देश मे अवसाद का वातावरण है. घपलों-घोटालों से लोग तंग हैं. महंगाई चरम पर है. डीजल, पेट्रोल की कीमतें बेतहाशा बढ़ी हैं. इन सबके लिए वोट-जुगाड़ू योजनाएं बनानेवाले लोग जिम्मेवार हैं.

ग्रामीण भारत अब भी 18वीं सदी में है. वहां न सड़क है, न बिजली, न साफ पेयजल. विकास की रोशनी के अभाव में नक्सलवाद पनप रहा है. क्या 24 घंटे बिजली का हक केवल शहरों को है? बिचौलिये कब तक किसानों का हक मारते रहेंगे? ग्रामीण कब तक इलाज से वंचित रहेंगे? और कितने किसानों को आत्महत्या के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया जायेगा? इन प्रश्नों के जवाब तलाशने ही होंगे.
अमृत कुमार, ई-मेल से

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola