आपराधिक तत्वों पर कसी जाये नकेल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Jun 2015 5:30 AM (IST)
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उत्तर प्रदेश में एक जून को पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मार देने की लोमहर्षक घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था की भयावह स्थिति को एक बार फिर रेखांकित किया है. मृतक पत्रकार ने मृत्युपूर्व बयान में एक वरिष्ठ मंत्री और स्थानीय पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया था. दो दिन पहले एक गांव में दबंगों ने […]
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उत्तर प्रदेश में एक जून को पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मार देने की लोमहर्षक घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था की भयावह स्थिति को एक बार फिर रेखांकित किया है. मृतक पत्रकार ने मृत्युपूर्व बयान में एक वरिष्ठ मंत्री और स्थानीय पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया था.
दो दिन पहले एक गांव में दबंगों ने एक बच्ची को जिंदाजला दिया. पिछले कुछ महीनों में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले की कई खबरें आयी हैं. इन घटनाओं का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि लगभग सभी घटनाओं में राज्य में सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी के मंत्रियों, विधायकों और नेताओं के साथ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के स्पष्ट संकेत हैं.
हमारे देश में राजनेताओं, पुलिस-तंत्र और अपराधियों की आपसी सांठगांठ कोई नयी बात नहीं है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इस गिरोहबंदी की हर हद टूटती हुई दिख रही है. पिछले वर्ष राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था देश में सबसे ज्यादा खराब है. यह सबसे बड़ी आबादी का राज्य है और यहां युवाओं की संख्या भी अधिक है. दुर्भाग्य की बात है कि एक युवा मुख्यमंत्री के शासन में विकास, रोजगार और सुशासन की जगह अपराधियों का बोलबाला है.
अपराधियों को शह और संरक्षण देने की बात को अगर अलग भी रख दें, तो सरकार की लापरवाही इसी तथ्य से जाहिर हो जाती है कि करीब 20 करोड़ की जनसंख्या तथा लगभग ढाई लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफलवाले इस राज्य में मात्र 1.8 लाख पुलिसकर्मी कार्यरत हैं.
इस संख्या में वरीय अधिकारी भी शामिल हैं और इनमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी अतिविशिष्ट तथा विशिष्ट लोगों की सुरक्षा में तैनात हैं. ऐसे में एक बहुत बड़ी आबादी अपराधियों और दबंगों के आतंक के साये में जीने को विवश है.
जगेंद्र सिंह की हत्या की खबर देश-विदेश की मीडिया में प्रमुखता से आने के बाद मंत्री और पुलिसकर्मियों के विरु द्ध मामला तो दर्ज कर लिया गया है और पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया है, लेकिन आरोपित मंत्री पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. उत्तर प्रदेश सरकार पर जनता और मीडिया द्वारा लगातार दबाव बनाये रखने की आवश्यकता है ताकि अपराधी तत्वों पर नकेल कसी जा सके.
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