शिलान्यास से राज्य की उम्मीदें बढ़ीं

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एचइसी क्षेत्र में विधानसभा की चहारदीवारी का शिलान्यास किया. राज्य बने 15 साल होने को हैं लेकिन राज्य का अपना विधानसभा भवन नहीं है. अब उम्मीद की जा रही है कि इसी क्षेत्र में झारखंड विधानसभा बनेगी. शुभ संकेत यह है कि इस बार लोगों ने विरोध नहीं किया. जो विस्थापित […]
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एचइसी क्षेत्र में विधानसभा की चहारदीवारी का शिलान्यास किया. राज्य बने 15 साल होने को हैं लेकिन राज्य का अपना विधानसभा भवन नहीं है. अब उम्मीद की जा रही है कि इसी क्षेत्र में झारखंड विधानसभा बनेगी. शुभ संकेत यह है कि इस बार लोगों ने विरोध नहीं किया. जो विस्थापित हैं, जिनकी जायज मांगें हैं, सरकार ने उन पर विचार करने का आश्वासन दिया.
खुद मुख्यमंत्री ने पहल की. इससे एक सकारात्मक माहौल बना है. सरकार किसी भी दल की हो, अगर हर कदम पर विरोध ही होता रहे तो काम कैसे होगा. अब लोग महसूस करने लगे हैं कि राज्य के विकास के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए. विकास दिखना चाहिए. यह तभी होगा जब सभी का साथ हो. ऐसा नहीं करने पर सरकार का सारा ध्यान विरोध को ही शांत करने में लग जायेगा. यह सच है कि कुछ नेता निजी लाभ के लिए हर जगह टांग अड़ाते हैं.
इससे विकास का काम प्रभावित होता है. अच्छे माहौल में शिलान्यास का होना इस बात का संकेत है कि अब गाड़ी पटरी पर आ सकती है. आवश्यक यह है कि चहारदीवारी का काम तेजी से हो. फिर विधानसभा भवन बनाना है तो उस पर काम हो. यह सरकार कम से कम पांच साल तक चलनेवाली है (जैसा बहुमत है). ऐसी स्थिति में रघुवर दास के पास पर्याप्त समय है.
काम तेजी से हो तो दो-तीन साल में पूरे क्षेत्र की तसवीर बदल सकती है. सारे भवन बन कर तैयार हो सकते हैं. देश के कई राज्यों में विधानसभा भवन ऐसे हैं जिन्हें देखने के लिए पर्यटक आते हैं (जैसे बेंगलुरू का). पैसा खर्च हो लेकिन झारखंड विधानसभा का भवन भी ऐसा बने जिसे देखने लोग आयें. देश में सबसे बेहतर हो. यह विधानसभा बार-बार नहीं बनती है.
इसलिए पूरी योजनाबद्ध तरीके से काम हो. अच्छे आर्किटेक्ट का चयन हो. गुणवत्ता का पूरा ख्याल हो. मॉनिटरिंग ऐसी हो कि कोई गड़बड़ी नहीं कर सके. दरअसल कोर कैपिटल की ओर बढ़ने का यह कदम है. कोर कैपिटल से ही काम नहीं चलनेवाला. जिस तरीके से रांची की आबादी बढ़ी है, चलना मुश्किल है, वैसे में जल्द से जल्द नयी राजधानी की तैयारी करनी होगी. जमीन बड़ा संकट है. खुले मन से लोग सोचें, उन्हें उनका वाजिब हक मिले, तो बेहतर राजधानी संभव है.
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