वर्तमान में एनजीओ की सार्थकता

Published at :27 May 2015 5:28 AM (IST)
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वर्तमान में एनजीओ की सार्थकता

देश में हजारों एनजीओ संचालित हैं, परंतु उपलिब्धयों की चर्चा करें, तो आज भी ये अपने लक्ष्य से काफी पीछे हैं. कारण यही है कि इन संस्थाओं की कार्य गुणवत्ता बढ़ाने के बजाय केवल इनकी संख्या बढ़ाने पर ध्यान दिया गया. दरअसल नाम और पैसे अर्जित करने की चाह में कहीं न कहीं समाज सेवा […]

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देश में हजारों एनजीओ संचालित हैं, परंतु उपलिब्धयों की चर्चा करें, तो आज भी ये अपने लक्ष्य से काफी पीछे हैं. कारण यही है कि इन संस्थाओं की कार्य गुणवत्ता बढ़ाने के बजाय केवल इनकी संख्या बढ़ाने पर ध्यान दिया गया.
दरअसल नाम और पैसे अर्जित करने की चाह में कहीं न कहीं समाज सेवा का मुख्य उद्देश्य ही विलुप्त हो गया. पिछले दिनों मेरे एक मित्र ने बताया कि वे एक नया एनजीओ शुरू करना चाहते हैं. उनहोंने जनभागीदारी के लिए मेरी भी सहायता मांगी.
मैंने उन्हें सलाह दी कि किसी पूर्व संचालित संस्था से जुड़ कर भी वे अपना उद्देश्य पूरा कर सकते हैं, परंतु उन्होंने ये कह कर इनकार कर दिया कि विचारों में असमानता होने पर कार्यों के क्रि यान्वन में दिक्कतें आयेंगी. संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य समाज सेवा और अपने विचारों को जन मानस तक पहुंचाना होना चाहिए.
नवनीत समरा, ई-मेल से
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