सलमान, सिनेमा और स्टार सिस्टम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 May 2015 12:35 AM (IST)
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आकार पटेल वरिष्ठ पत्रकार हमें बॉलीवुड से निष्पक्ष होने या सलमान खान के मसले पर कोई संतुलित राय रखने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, और न ही सलमान खान या संजय दत्त जैसे स्टारों पर फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के विचारों को गंभीरता से लेना चाहिए. जो मुंबई के उपनगरीय इलाके बांद्रा में रहते […]
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आकार पटेल
वरिष्ठ पत्रकार
हमें बॉलीवुड से निष्पक्ष होने या सलमान खान के मसले पर कोई संतुलित राय रखने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, और न ही सलमान खान या संजय दत्त जैसे स्टारों पर फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के विचारों को गंभीरता से लेना चाहिए.
जो मुंबई के उपनगरीय इलाके बांद्रा में रहते हैं, मैं भी वहां कई वर्षो तक रहा था, वे सलमान खान की लोकप्रियता से परिचित हैं. बॉलीवुड के तीनों विख्यात खान बांद्रा में ही रहते हैं, लेकिन सलमान बाकी दो से भिन्न हैं. शाहरुख खान का बंगला ‘मन्नत’ बड़ा है और दिखाई पड़ता है तथा इसके दरवाजे मुख्य सड़क पर खुलते हैं.
उनके कुछ प्रशंसक आसपास घूमते हुए अक्सर नजर आ जाते हैं. उनसे भी कम प्रशंसक आमिर खान के घर के पास दिखते हैं. शायद यह जान-बूझ कर किया गया है, क्योंकि वे दूसरों से अधिक निजता पसंद करते हैं. परंतु, सलमान खान के घर के बाहर हमेशा ही भीड़ खड़ी मिलती है, चाहे छुट्टी का दिन हो, कोई त्योहार हो या कोई सामान्य दिन हो. उनमें स्टार पॉवर पूरी तरह से भरी पड़ी है.
यह आकलन बांद्रा डाकघर से भी पुष्ट होता है. एक अखबार, जिसमें मैं काम करता था, ने रिपोर्ट दी थी कि सलमान खान के पास आनेवाली चिट्ठियां बेशुमार थीं और उन्हें भेजे जानेवाले उपहारों की संख्या अन्य दो खानों से बहुत अधिक थी. यह इ-मेल के मौजूदा जमाने से पहले की बात है. अगर मुङो ठीक से याद है, तो सलमान के पास आनेवाली डाक शाहरुख और आमिर को संबोधित पत्रों से चार-पांच गुणा ज्यादा थी.
जिस दुर्घटना में उन्हें सजा हुई है, उससे करीब एक साल पहले ऐश्वर्य राय के पिता ने हमारे अखबार से संपर्क किया था. वे अपनी बेटी को लेकर चिंतित थे, जो तब सलमान खान की प्रेमिका थीं.
सलमान के व्यवहार से इन बुजुर्ग को डर लग रहा था. उन्होंने बताया था कि सलमान खान आधी रात को आते हैं और घर में प्रवेश नहीं मिलने पर जोर-जोर से दरवाजा पीटने लगते हैं. यह वही समय था, जब ऐश्वर्य ने इस संबंध से बाहर निकलने का इरादा कर लिया था, पर सलमान उन्हें छोड़ने को तैयार नहीं थे.
निर्देशक अजीज मिर्जा की एक फिल्म, जिसमें शाहरुख खान और ऐश्वर्य राय अभिनय कर रहे थे, की शूटिंग के दौरान एक बार सलमान खान सेट पर आये और सड़क पर लोटने लगे. इससे शूटिंग रुक गयी. शाहरुख खान को गुस्सा भले न आया हो, पर उन्हें खीझ जरूर हुई थी.
बाद में दोनों के संबंध बहुत खराब होते गये. उसी दौरान शहर के बाहर सलमान के फार्म हाउस पर जंगली जानवरों को अवैध रूप से पकड़ कर रखने की खबरें आयी थीं. जंगली हिरणों को मारने की घटना, जिसमें सलमान दोषी सिद्ध हो चुके हैं, इसके कई वर्ष बाद घटी थी.
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि इस व्यक्ति के साथ समस्याएं थीं और उसे समझाने-बुझाने और उसकी देखभाल की जरूरत थी. दरअसल सलमान को बॉलीवुड के लोगों द्वारा ही समर्थन और उत्साह मिलता था. उन्हें सजा दिये जाने के बाद अभिजीत ने ‘सड़क पर सोने’ के लिए पीड़ितों को ही दोषी ठहराया जिसके कारण उन्होंने मौत को बुलावा दिया था. हालांकि सच यह है कि पीड़ित सड़क पर नहीं सो रहे थे.
बॉलीवुड के लोग ऐसा कर रहे हैं और वे सलमान का समर्थन करना जारी रखेंगे. इसके पीछे एक कारण है. बॉलीवुड दुनिया के तीन सफल फिल्म उद्योगों में से एक है. अन्य दो हांगकांग और हॉलीवुड हैं. इन तीनों में ही स्टार सिस्टम है, पर बॉलीवुड अपेक्षाकृत बहुत छोटा है. कुल चार-पांच लोग ही फिल्म के रिलीज के शुरुआती कुछ दिनों में ही बड़ी कमाई की गारंटी दे सकते हैं. फिल्म की सफलता के लिहाज से ये दिन बड़े महत्वपूर्ण होते हैं.
ये लोग फिल्म उद्योग के सबसे ताकतवर लोग हैं. यह भी बिल्कुल सही है कि यह ताकत उन्होंने अपनी प्रतिभा से हासिल की है. अमिताभ बच्चन ने अपने बेटे को आगे बढ़ाने के लिए चाहे जितनी कोशिश की हो, वे उन्हें खानों की तरह सफल नहीं बना सके, क्योंकि लोगों ने उन्हें सलमान, शाहरुख और आमिर की तरह स्वीकार नहीं किया.
लेकिन, इस ताकत का एक आंतरिक आयाम भी है. बॉलीवुड में काम करनेवाले लोग, चाहे वे निर्देशक हों, गायक हों, प्रसाधन विशेषज्ञ हों, या किसी भी अन्य विभाग में कार्यरत हों, उन्हें किसी एक स्टार के साथ जुड़ कर रहना होता है, भले ही वे कितने भी प्रतिभाशाली क्यों न हों. ऐसा नहीं होने पर उन्हें अन्य लोगों के साथ छोटी और सस्ती फिल्मों मे ही काम करके संतोष करना पड़ता है.
हालांकि गुलजार और अनुराग कश्यप जैसे कुछ अपवाद भी हैं, पर उनकी संख्या बहुत ही कम है. स्टार के इर्द-गिर्द चक्कर लगा रहे अधिकांश लोगों का संबंध परजीविता का ही होता है और यह तभी तक कायम रहता है, जब तक संरक्षण मिलता रहता है. यह बिल्कुल मुगल बादशाह की कृपा की तरह है. यहां भी पूरी तरह और बिला शर्त वफादारी की उम्मीद की जाती है. यह स्टार ही तय करता है कि वह किसके साथ काम करेगा, और, हॉलीवुड से उलट, यह सिलसिला ढेरों अन्य चीजों से जुड़ता है. उदाहरण के लिए, सलमान का परिवार भी उनकी फिल्मों का नियमित हिस्सा होता है क्योंकि न सिर्फ स्टार फिल्म के लिए महत्वपूर्ण होता है, बल्कि वही फिल्म होता है.
एक दशक पहले मुंबई में जब हिंदुस्तान टाइम्स शुरू हुआ था, तब पुलिस द्वारा सलमान और ऐश्वर्य की फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग का ब्योरा उसकी पहली सुर्खी बना था. सलमान खान इस बातचीत में ऐश्वर्य को अपने अपने अंडरवर्ल्ड से संपर्को का हवाला देकर धमका रहे थे.
इस बातचीत को अवैध तरीके से रिकॉर्ड करनेवाली पुलिस ने इससे अपना पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन इस खबर को मशहूर क्राइम रिपोर्टर जे डे (जिनकी बाद में गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी) ने रिपोर्ट किया था, जो इसके सच होने का बड़ा आधार है.
हमारे अखबार ने भी इस बातचीत बाद में छापा था, जिसमें सलमान ने प्रिटी जिंटा के बारे में अभद्र टिप्पणी की थी. वह इससे इतनी आहत हो गयीं कि उन्होंने अखबार के खिलाफ तो मुकदमा दायर कर दिया, पर अभद्रता करनेवाले सलमान के विरुद्ध कुछ नहीं कहा.
दरअसल, इस सप्ताह सजा होने के बाद वे अपनी टीम का मैच छोड़ बंगलुरू से मुंबई सलमान से हमदर्दी दिखाने आयी थीं. मुङो इससे आश्चर्य नहीं हुआ.
हमें बॉलीवुड से निष्पक्ष होने या सलमान खान के मसले पर कोई संतुलित राय रखने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, और न ही सलमान खान या संजय दत्त जैसे स्टारों पर फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के विचारों को गंभीरता से लेना चाहिए.
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