रुक नहीं रही है काले धन में वृद्धि

Published at :05 May 2015 1:32 AM (IST)
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रुक नहीं रही है काले धन में वृद्धि

काले धनके जमाखोरों को दंडित करने का प्रस्तावित विधेयक इस हफ्ते लोकसभा में चर्चा के लिए लाया जा सकता है. चिट फंड कंपनियों की जालसाजी के शिकार लोगों को मुआवजा देने का एक संशोधन भी सदन में विचाराधीन है. इस बीच केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने काले धन की जांच कर रहे विशेष जांच दल […]

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काले धनके जमाखोरों को दंडित करने का प्रस्तावित विधेयक इस हफ्ते लोकसभा में चर्चा के लिए लाया जा सकता है. चिट फंड कंपनियों की जालसाजी के शिकार लोगों को मुआवजा देने का एक संशोधन भी सदन में विचाराधीन है.
इस बीच केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने काले धन की जांच कर रहे विशेष जांच दल को जानकारी दी है कि बीते 31 मार्च तक एचएसबीसी की सूची में शामिल लोगों के खिलाफ 120 मामले दर्ज किये जा चुके हैं.
ये खबरें निश्चित रूप से उत्साहजनक हैं, लेकिन काले धन की उत्पत्ति पर अंकुश के लिए अभी कई स्तरों पर गंभीर प्रयासों की जरूरत है. प्रस्तावित विधेयक का जोर भ्रष्टाचार के दोषी की सजा बढ़ाने पर है, जबकि जरूरत भ्रष्टाचार को होने से पहले ही रोकने की है. पिछले कुछ वर्षो से आंदोलनों और सरकारों की सक्रियता के बावजूद काले धन में कमी के संकेत नहीं हैं.
प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने विशेष जांच दल को यह जानकारी भी दी है कि एचएसबीसी की सूची में अघोषित आय की कुल राशि पिछले महीने तक 4,700 करोड़ रुपये हो चुकी है, जबकि 2014 के अंत में यह 1,500 करोड़ थी. कुछ दिन पहले ही सत्यम कंप्यूटर्स के संस्थापक रामालिंगा राजू को जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप में सजा हुई है, फिर भी कंपनियां अपने खातों और मुनाफे के आंकड़ों में हेराफेरी कर निवेशकों का दोहन कर रही हैं.
रिपोर्टो के अनुसार, शेयर बाजार की नियामक संस्था सेबी और राजस्व इंटेलिजेंस एजेंसियां करीब 500 ऐसी कंपनियों के दस्तावेजों की जांच कर रही हैं, जिन पर दो लाख करोड़ की भारी रकम अवैध तरीके से जुटाने का शक है. धन लाने के लिए इन कंपनियों ने कथित रूप से डिबेंचर्स और निजी प्लेसमेंट के तरीकों की आड़ ली है. एजेंसियों को संदेह है कि यह कवायद काले धन के लेन-देन से जुड़ी है. इन निवेशों में नियम-कायदों की अवहेलना के संकेत मिले हैं.
इसी तरह गंभीर जालसाजियों की जांच करनेवाली एक सरकारी संस्था की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि देश की सबसे बड़ी 500 कंपनियों में एक-तिहाई कंपनियां अपने खातों में हेराफेरी करती हैं. ऐसे में सरकार को राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए विभिन्न संस्थाओं की परस्पर सहभागिता से काले धन के खतरनाक जाल को नष्ट करना चाहिए.
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