एक अतिशय दुर्भाग्य का दिन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Apr 2015 5:30 AM (IST)
विज्ञापन

लोकसभा में विपक्ष की मांग थी, प्रश्नकाल स्थगित हो, किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर तुरंत चर्चा हो. हल्ला उठा, सदन बीस मिनट स्थगित रहा. कुछ ने वॉकआउट किया, कुछ ने अध्यक्ष के आसन के समीप नारेबाजी की. अध्यक्ष ने कहा किसानों की आत्महत्या का मामला गंभीर है, इसका राजनीतिकरण मत कीजिए. अध्यक्ष को लगा […]
विज्ञापन
लोकसभा में विपक्ष की मांग थी, प्रश्नकाल स्थगित हो, किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर तुरंत चर्चा हो. हल्ला उठा, सदन बीस मिनट स्थगित रहा. कुछ ने वॉकआउट किया, कुछ ने अध्यक्ष के आसन के समीप नारेबाजी की.
अध्यक्ष ने कहा किसानों की आत्महत्या का मामला गंभीर है, इसका राजनीतिकरण मत कीजिए. अध्यक्ष को लगा लोकतंत्र में संसदीय प्रक्रियाओं का बड़ा ही महत्व है, सो प्रश्नकाल महत्वपूर्ण है.
सदन में मौजूद सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को लगा कि प्रश्नकाल तो स्थगित होना ही चाहिए, क्योंकि किसानों की आत्महत्या का मुद्दा उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है. कार्यवाही फिर शुरू हुई, तो सबने अपनी बात कही. गृहमंत्री ने कहा, आम आदमी पार्टी की सभा में दौसा जिले के किसान गजेंद्र सिंह को आत्महत्या से बचाने के लिए ‘दिल्ली पुलिस लोगों को ताली बजाने से रोक रही थी.’ गृहमंत्री के जवाब से हमेशा की तरह सत्तापक्ष सहमत और विपक्ष असहमत था. सदन से बाहर भी सब अपनी जिम्मेवारी निभा रहे थे. अरविंद केजरीवाल ने गजेंद्र सिंह की आत्महत्या पर जांच के आदेश दिये. टेलीविजन चीख रहा है, उसके हाथ में गजेंद्र सिंह का सुसाइड नोट है.
गजेंद्र ने जब भरी सभा में फांसी की गांठ बांध कर सुसाइड नोट फेंका, तब होड़ मची थी चैनल वालों के बीच. जिसके पास सुसाइड नोट होगा, उसकी कहानी सबसे ब्रेकिंग न्यूज मानी जायेगी. गजेंद्र ने जब आत्महत्या की, तब केजरीवाल अपने मंत्रियों समेत किसानों की दुर्दशा पर सभा कर रहे थे. केजरीवाल और उनका मंत्रिमंडल इस तरह गजेंद्र की आत्महत्या का साक्षी है. टीवी पर किसान-आत्महत्या की खबरें सुनानेवाले भी उसकी आत्महत्या के साक्षी हैं.
खबर को लाइव देखनेवाले हम सब भी उसकी आत्महत्या के साक्षी हैं. सब दुखी हैं. संसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, पुलिस, मीडिया और दर्शक-पाठक सब अपनी-अपनी भूमिकाएं दुरुस्त निभा रहे हैं. बस, फसल की बरबादी से परेशान तीन बच्चों का पिता गजेंद्र हमारे बीच नहीं है.
और, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में निभायी जा रही भूमिकाओं के बीच हर तीस मिनट पर कोई ना कोई गजेंद्र अपनी किसानी से परेशान आत्महत्या कर रहा है. हमें सोचना होगा कि क्या गजेंद्र की आत्महत्या का दिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की पराजय का भी दिन था!
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




