ऐसे ही होगी गैर बराबरी की भरपाई?
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Apr 2015 6:24 AM (IST)
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इन दिनों हमारे देश में एक नया चलन शुरू हो गया है. हम जानते हैं कि अतीत में स्त्रियों के साथ लिंगभेद के नाम पर गैर बराबरी हुई है. पितृसत्तात्मक समाज में पुरुषों को आजादी मिली और स्त्रियों के पर काट लिये गये. इसकी भरपाई कुछ अजीब तरह से की जा रही है. कुछ बेटे […]
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इन दिनों हमारे देश में एक नया चलन शुरू हो गया है. हम जानते हैं कि अतीत में स्त्रियों के साथ लिंगभेद के नाम पर गैर बराबरी हुई है. पितृसत्तात्मक समाज में पुरुषों को आजादी मिली और स्त्रियों के पर काट लिये गये.
इसकी भरपाई कुछ अजीब तरह से की जा रही है. कुछ बेटे बड़े आलसी होते हैं. बेटियों को बैसाखियां देने के चक्की में उन्हें भी कुछ बेटों की तरह ही आलसी बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. बेटा को बेटी नहीं कहते हैं, पर बेटी को बेटा जरूर कहा जाने लगा है.
अत्याधुनिक, उदारवादी, प्रगतिशील बनने के चक्कर में बेटियों को अप्रत्यक्ष हरी झंडी दिखायी जा रही है कि आलस के क्षेत्र में तुम भी बेटों की तरह आगे बढ़ो. शायद यही वजह है कि इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स के शिकार पिता भी कुर्बान होने में ही अपने जीवन की सार्थकता को मानने लगे हैं.
उषा किरण, रांची
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