संभावनाओं के द्वार पर खड़ी माकपा

Published at :21 Apr 2015 6:13 AM (IST)
विज्ञापन
संभावनाओं के द्वार पर खड़ी माकपा

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का 21वां राष्ट्रीय सम्मेलन ऐसे समय में संपन्न हुआ है, जब देश में वामपंथ वर्चस्व और जनाधार में निरंतर कमी से जूझ रहा है. संसद और विधानसभाओं में माकपा की उपस्थिति पार्टी के इतिहास के न्यूनतम स्तर पर है. इससे उपजी चिंता की झलक आयोजन की राजनीतिक समीक्षाओं, नीतिगत निर्णयों तथा रणनीतिक […]

विज्ञापन
मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का 21वां राष्ट्रीय सम्मेलन ऐसे समय में संपन्न हुआ है, जब देश में वामपंथ वर्चस्व और जनाधार में निरंतर कमी से जूझ रहा है. संसद और विधानसभाओं में माकपा की उपस्थिति पार्टी के इतिहास के न्यूनतम स्तर पर है. इससे उपजी चिंता की झलक आयोजन की राजनीतिक समीक्षाओं, नीतिगत निर्णयों तथा रणनीतिक योजनाओं में दिखती है. देश की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी माकपा छह राष्ट्रीय दलों में भी एक है.
सीमित शक्ति के बावजूद देश-दुनिया की समस्याओं के बौद्धिक विश्लेषणों तथा विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय जन-संगठनों के हस्तक्षेप के कारण उसकी प्रासंगिकता और जनमत-निर्माण में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है. पार्टी अपने जनाधार को वापस पाने में कामयाब होगी या नहीं, यह तो समय के गर्भ में है, परंतु सम्मेलन में लिए गये निर्णय इशारा करते हैं कि माकपा चुनौतियों का सामना करने के लिए कृतसंकल्प है.
पार्टी के नवनिर्वाचित महासचिव सीताराम येचुरी ने सही ही कहा है कि वामपंथ के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं. लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है, सांप्रदायिकता के खतरे सिर उठा रहे हैं तथा लोकतांत्रिक अधिकारों पर संकट है, किंतु प्रश्न यह है कि क्या पार्टी का राजनीतिक दर्शन, उसकी गतिविधियां और सांगठनिक क्षमता इन मसलों पर व्यापक जन-लामबंदी का आधार बन सकेंगे? वामपंथ के सिद्धांतों का मूल सूत्र आंदोलन ही हैं.
सीताराम येचुरी जैसे उदार और परिचित, तथा अपेक्षाकृत युवा, चेहरे को नया मुखिया बना कर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह व्यावहारिक राजनीति की ओर उन्मुख हो रही है, जहां सैद्धांतिक और रणनीतिक नरमी की गुंजाइश होती है. वामपंथी और लोकतांत्रिक खेमों में एकता बनाने तथा अन्य दलों से चुनावों में मुद्दे साङोदारी के फैसले ठोस हस्तक्षेप का संकल्प हैं.
भाजपा की बढ़त, कांग्रेस का सिमटना और जनता परिवार की एकजुटता जैसी स्थितियां माकपा के लिए चुनौती हैं, लेकिन इनसे संभावना के द्वार भी खुलते हैं. शीर्ष समितियों में युवाओं, अल्पसंख्यकों, वंचितों और महिलाओं को अधिक जगह मिलने से पार्टी को नयी ऊर्जा मिल सकती है. अब देखना यह है कि माकपा और अन्य वामपंथी दल अपनी प्रासंगिकता को किस हद तक हासिल कर पाते हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola