अब और देर न हो स्थानीयता नीति में
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Mar 2015 11:55 PM (IST)
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झारखंड सरकार स्थानीयता नीति तय करने के लिए गंभीर दिख रही है. विधानसभा में भी घोषणा की गयी थी कि जल्द से जल्द इसे घोषित कर दिया जायेगा. इसी क्रम में एनडीए के विधायकों की मुख्यमंत्री ने बैठक बुलायी थी. इसमें अधिकतर विधायकों की राय थी कि कटऑफ डेट 15 नवंबर 2000 रखी जाये, जिस […]
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झारखंड सरकार स्थानीयता नीति तय करने के लिए गंभीर दिख रही है. विधानसभा में भी घोषणा की गयी थी कि जल्द से जल्द इसे घोषित कर दिया जायेगा. इसी क्रम में एनडीए के विधायकों की मुख्यमंत्री ने बैठक बुलायी थी. इसमें अधिकतर विधायकों की राय थी कि कटऑफ डेट 15 नवंबर 2000 रखी जाये, जिस दिन झारखंड राज्य का गठन किया गया था. कुछ की राय अलग थी. कटऑफ डेट तय करना आसान नहीं है.
14 साल से ज्यादा हो गये राज्य बने, लेकिन अभी तक स्थानीयता परिभाषित नहीं हो गयी. पूर्व की हेमंत सरकार ने भी कमेटी बनायी थी, जिसने अपनी अनुशंसा भी सौंपी थी. इसलिए इस सरकार के पास एक आधार तो है. झारखंड में स्थानीयता नीति नहीं होने के कारण भरतियां प्रभावित हो रही हैं.
अभी की रघुवर सरकार भी जानती है कि जब तक इस मसले को सुलझाया नहीं जायेगा, राज्य का विकास बाधित रहेगा, लोगों को नौकरियां नहीं मिलेंगी. अब यह जिम्मेवारी सरकार और विपक्ष दोनों की है कि वे ईमानदारी से पहल करें. सबसे बड़ा संकट यह है कि किसे झारखंड का मूलवासी माना जाये. 1932 का खतियान अव्यावहारिक है, पर नीति ऐसी बने जिससे यहां के मूलवासियों को लाभ मिले. तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियां हर राज्य में वहां के मूल निवासियों को मिलती हैं. हाल में झारखंड में शिक्षक नियुक्ति हुई, उसमें दूसरे राज्यों के लोग ज्यादा हैं.
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि स्थानीयता नीति नहीं है. इस बनाते समय यह ध्यान देना चाहिए कि सिर्फ जमीन ही आधार नहीं हो. झारखंड में ऐसे लाखों लोग हैं जिनकी तीन-चार पीढ़ी यहां रहती आयी हैं, लेकिन उनके पास जमीन नहीं है. अनेक आदिवासी ऐसे हैं जो भूमिहीन हैं लेकिन सैकड़ों सालों से यहां रह रहे हैं. कई जिलों में खासमहल की जमीन लोगों को मिली है जिसका खतियान नहीं बनता. इन बातों पर गौर करना होगा.
जन्मस्थान व पढ़ाई को भी आधार बनाया जा सकता है. यहां ध्यान देना होगा कि नीति ऐसी बने जिससे मूलवासियों को लाभ मिले. तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरी पर उसका हक हो. ऐसा न हो कि हाल में दूसरे राज्यों से यहां आये लोगों और 50-100 साल से यहां रहनेवालों में फर्क ही नहीं रह जाये. नीति ऐसी बने जिससे सभी के साथ न्याय हो.
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