डरने की बात नहीं पर सतर्कता बरतें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Mar 2015 12:25 AM (IST)
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जमशेदपुर व रांची में स्वाइन फ्लू से तीन लोगों की मौत के बाद झारखंड में भय का माहौल है. यह वह बीमारी है जिससे पूरे देश में 1500 से ज्यादा लोगों की इस साल मौत हो चुकी है. इसलिए जब इस बीमारी से झारखंड में मौत हुई तो लोगों का भयभीत होना स्वाभाविक है. लोग […]
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जमशेदपुर व रांची में स्वाइन फ्लू से तीन लोगों की मौत के बाद झारखंड में भय का माहौल है. यह वह बीमारी है जिससे पूरे देश में 1500 से ज्यादा लोगों की इस साल मौत हो चुकी है. इसलिए जब इस बीमारी से झारखंड में मौत हुई तो लोगों का भयभीत होना स्वाभाविक है.
लोग सतर्क जरूर रहें, लेकिन ज्यादा डरने की बात इसलिए नहीं है क्योंकि इससे निबटने की तैयारी का बहुत समय मिल गया है. गुजरात और राजस्थान में ज्यादा मौत इसलिए हुई क्योंकि अचानक यह बीमारी फैली और ये राज्य इसके लिए तैयार नहीं थे.
वहां का मौसम भी अलग है. अब दवाएं आ चुकी हैं. टीके आ चुके हैं. झारखंड में जैसे ही खबर मिली कि तीन लोगों की मौत हुई है, विधानसभा में हंगामा हुआ. पक्ष और विपक्ष दोनों गंभीर दिखें. सरकार ने कई घोषणाएं कीं. हर जिले में स्वाइन फ्लू से निबटने के लिए दवा पहुंचा दी गयी है. एक बड़ी परेशानी है जांच की. स्वाइन फ्लू है या नहीं, इसकी जांच की व्यवस्था झारखंड में नहीं है. सैंपल लेकर कोलकाता जाना पड़ता है. जब तक जांच रिपोर्ट आती है, बीमारी की पहचान होती है, मरीज की हालत बदतर हो जाती है. इतने बड़े राज्य में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा नहीं होना चिंता की बात है. इसे सरकार ने समझा और तय किया कि रिम्स में लैब का उन्नयन किया जायेगा.
24 घंटे में ही यह निर्णय ले लिया गया. जितनी जल्द यहां जांच की सुविधा हो जाये, बेहतर है. लेकिन मरीजों की जांच में विलंब नहीं किया जाये. कुछ घटनाएं सामने आयी हैं कि मरीज जांच का इंतजार कर रहे हैं. जांच नहीं हो पा रही है. आइसोलेशन वार्ड तो हैं लेकिन वहां वेंटीलेटर की सुविधा नहीं है. ऐसे में स्वाइन फ्लू के मरीजों का इंलाज कैसे हो पायेगा? यह बात सही है कि अब तक जिनकी भी मौत हुई है, वे सभी लोग राज्य के बाहर से आये थे. इसलिए इस बात का ख्याल रखना होगा कि बाहर से स्वाइन फ्लू लेकर आये मरीजों पर रोक लगे.
इसके लिए सरकार ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों पर टीम तैनात की है. लेकिन पहचान करना आसान नहीं होगा. राज्य में होमियोपैथ के कई चिकित्सकों और संस्थाओं ने मुफ्त में स्वाइन फ्लू से बचाव की दवा बांटने की व्यवस्था की है. यह प्रशंसनीय है. सभी मिल कर स्वाइन फ्लू से लड़ें, तो इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
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