शहर की सुंदरता पर होर्डिग का दाग

Published at :02 Mar 2015 12:15 AM (IST)
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शहर की सुंदरता पर होर्डिग का दाग

पटना और रांची को भी सुंदर महानगर बनने का हक है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब नगर निगम की इच्छाशक्ति मजबूत हो. अब तक स्थिति यही है कि पटना जैसा ऐतिहासिक शहर गंदे व बदसूरत शहरों में शुमार हैं. इसके सौंदर्यीकरण के प्रयासों पर पानी फेरने में होर्डिग की बड़ी भागीदारी है. इस मामले […]

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पटना और रांची को भी सुंदर महानगर बनने का हक है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब नगर निगम की इच्छाशक्ति मजबूत हो. अब तक स्थिति यही है कि पटना जैसा ऐतिहासिक शहर गंदे व बदसूरत शहरों में शुमार हैं. इसके सौंदर्यीकरण के प्रयासों पर पानी फेरने में होर्डिग की बड़ी भागीदारी है.

इस मामले में पटना हाइकोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया है. दो साल पहले नगर निगम क्षेत्र की स्वच्छता और सुंदरता से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने शहर में बेतरतीब ढंग से होर्डिग एवं बैनर लगाने पर चिंता जतायी थी.

कोर्ट ने बिना इजाजत के और भद्दे ढंग से लगे होर्डिग को हटाने का आदेश दिया था. निगम की स्थायी समिति में भी मामला उठता रहा है, लेकिन इन सब के बावजूद बेतरतीब और भद्दे होर्डिग से शहर पटा हुआ है. कोई भी इलाका ऐसा नहीं है, जहां होर्डिग लगाने के नियमों की अनदेखी नहीं हो रही है. सरकारी और गैर सरकारी मकानों की दीवारों व छतों से लेकर महापुरुषों के प्रतिमा स्थल तक ऐसे होर्डिग-बैनर से भरे हुए हैं, जबकि होर्डिग को लेकर निगम की नियमावली है. होर्डिग को नियंत्रित करने का मामला केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है.

यह सड़क सुरक्षा और टैक्स से भी जुड़ा है. यह अरबों के कारोबार का मामला है. जाहिर है, इसमें भी वह गणित काम करता है, जो बड़े कारोबार का स्याह पक्ष है. आवासीय भवनों की छतों और दीवारों को विज्ञापन में इस्तेमाल का लाभ इसके मालिक को भी है. बिहार म्यूनिसिपल एक्ट के तहत ऐसे भवन मालिकों को निगम से अनुमति लेनी है. निगम को उनसे टैक्स मिलना है. जब भी निगम में होर्डिग का मामला आता है, तब निगम टैक्स वसूली के सवाल में उलझ कर रह जाता है. हद तो यह है कि सड़क के बीचों-बीच और डिवाइडर पर भी विज्ञापन चिपकाये गये हैं. ऐसे विज्ञापन लगाने वाली कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन जिस पैमाने पर नियम की अनदेखी हो रही है, उससे निगम की इच्छाशक्ति को लेकर जनता में संशय पैदा होना स्वाभाविक है. भले होर्डिग कारोबार से जुड़े कई घटक हों, इसे नियंत्रित करने की ठोस पहल तो नगर निगम को ही करनी होगी. निगम को हो रहे आर्थिक नुकसान पर भी इससे अंकुश लग सकेगा. ये कोई एक शहर का रोना नहीं है.

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