स्वाइन फ्लू और सरकारी उदासीनता

स्वाइन फ्लू आज हमारे देश के सामने एक बड़ी चुनौती बन गया है. हमारे देश में अभी तक स्वाइन फ्लू से होनेवाली मौतों की संख्या आठ सौ के पास पहुंच चुकी है और हजारों लोग इसकी चपेट में आ गये हैं. सरकारी तंत्र चाहे जितने भी दावे कर ले, लेकिन अभी तक इसे रोकने में […]
स्वाइन फ्लू आज हमारे देश के सामने एक बड़ी चुनौती बन गया है. हमारे देश में अभी तक स्वाइन फ्लू से होनेवाली मौतों की संख्या आठ सौ के पास पहुंच चुकी है और हजारों लोग इसकी चपेट में आ गये हैं. सरकारी तंत्र चाहे जितने भी दावे कर ले, लेकिन अभी तक इसे रोकने में असफल ही साबित हो रहा है.
स्वाइन फ्लू से होनेवाली मौतों का कारण मरीजों की उपेक्षा और जानकारी का न होना है. हमारे राज्य पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री कहती हैं कि स्वाइन फ्लू मच्छरों के काटने से फैला है. जब मुख्यमंत्री ही इस बीमारी से अनभिज्ञ हों, तो आम जनता को वे कैसे जाग्रत और समुचित इलाज मुहैया करवा पायेंगी. हमारे देश के मंत्रियों को भी इस बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है. चाहे वे गुजरात के हों या फिर राजस्थान के. इसके बावजूद हमारी सरकारें इस ओर ध्यान नहीं दे रही हैं.
आलोक कुमार, हावड़ा
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