सबसे महत्वपूर्ण है संसद की गरिमा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Feb 2015 5:38 AM (IST)
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संसद के बजट-सत्र के पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष से संबद्ध पार्टियों ने कार्यवाही के सुचारु संचालन में सहयोग का आश्वासन दिया है, जो स्वागतयोग्य है. परंतु, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पिछले सत्र की ही तरह इस बार भी दोनों सदनों में हंगामे का नजारा आम होगा. यूं तो संसद के किसी भी […]
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संसद के बजट-सत्र के पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष से संबद्ध पार्टियों ने कार्यवाही के सुचारु संचालन में सहयोग का आश्वासन दिया है, जो स्वागतयोग्य है. परंतु, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पिछले सत्र की ही तरह इस बार भी दोनों सदनों में हंगामे का नजारा आम होगा. यूं तो संसद के किसी भी सत्र की अपनी महत्ता है, पर इस सत्र में आम बजट, रेल बजट, वार्षिक आर्थिक समीक्षा जैसे अत्यंत आवश्यक विषयों पर बहसें होंगी तथा सरकार द्वारा जारी अध्यादेशों पर भी चर्चा होगी.
लोकसभा में सरकार के पास भारी बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में वह अल्पमत में है. ऐसे में सुचारु कार्यवाही के लिए सरकार को विपक्ष के साथ समुचित तालमेल करने की जरूरत पड़ेगी. निश्चित रूप से विपक्ष के पास ऐसे अनेक मुद्दे हैं, जिन पर वह सरकार को घेरने की कोशिश करेगी. राज्यसभा में बजट प्रस्तावों को पारित कराने के लिए सरकार को विपक्ष के संशोधनों को मानना भी पड़ सकता है. सरकार को विवादित भूमि अधिग्रहण, कोयला खदानों की नीलामी और बीमा से संबंधित अध्यादेशों पर प्रतिपक्ष की कड़ी आलोचना का सामना करना है. पिछला सत्र काफी हंगामेदार रहा था.
लोकसभा में तो संख्या बल के जरिये सरकार विपक्ष के हमले को आसानी से ङोल गयी थी, लेकिन राज्यसभा में उसे बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा था. तब विपक्ष की मांग यह थी कि प्रधानमंत्री अपने दल और अन्य संगठनों के लोगों के भड़काऊ बयानों पर सदन में अपनी बात रखें. सरकार के अड़ियल रुख और विपक्ष के तेवरों से कार्यवाही लगभग पूरी अवधि तक बाधित रही थी. तब सरकार ने इस अवरोध का ठीकरा विपक्ष के माथे फोड़ने की कोशिश की थी.
संसद को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेवारी हर सदस्य और दल की है, लेकिन इस संबंध में सरकार की जवाबदेही अधिक है. यह उसकी जिम्मेवारी है कि वह जन-प्रतिनिधियों के सवालों का संतोषजनक जवाब दे. हंगामे से न सिर्फ देश का धन बरबाद होता है, बल्कि इससे हमारी प्रगति और छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. एक तरफ सांसदों का यह कर्तव्य है कि वे संसद की गरिमा का मान बनाये रखें, वहीं नागरिकों को भी सजग और सचेत होकर अपने प्रतिनिधियों के क्रियाकलापों पर निगाह रखनी चाहिए.
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