ब्याज दर में कमी के वित्तीय निहितार्थ

Published at :17 Jan 2015 5:45 AM (IST)
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ब्याज दर में कमी के वित्तीय निहितार्थ

रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को प्रदत्त ¬ण पर ब्याज दर में 0.25 की कटौती का व्यापक स्वागत स्वाभाविक है. रिजर्व बैंक से यह उम्मीद की जा रही थी कि वह ब्याज दरों में कटौती के जरिये उपभोक्ताओं और उद्योग जगत को राहत देकर आर्थिक विकास के लिए माहौल बनाने में मदद देगा. हालांकि इस मुद्दे […]

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रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को प्रदत्त ¬ण पर ब्याज दर में 0.25 की कटौती का व्यापक स्वागत स्वाभाविक है. रिजर्व बैंक से यह उम्मीद की जा रही थी कि वह ब्याज दरों में कटौती के जरिये उपभोक्ताओं और उद्योग जगत को राहत देकर आर्थिक विकास के लिए माहौल बनाने में मदद देगा.
हालांकि इस मुद्दे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली और रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के बीच मतभेद की खबरें भी आ रही थीं. तीन फरवरी को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा होनी है. इससे दो सप्ताह पूर्व हुई इस कटौती के बाद समीक्षा के दिन इसमें और कमी की उम्मीद की जा रही है. अनुमान है कि बजट में सरकार कई बड़े निर्णय ले सकती है, जिन्हें अमली जामा पहनाने के लिए ब्याज दर का कम होना जरूरी है, ताकि सरकारी पहल के प्रति आम उपभोक्ताओं, बैंकों और निवेशकों का रुख सकारात्मक हो सके. विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.5 फीसदी तक की कमी कर सकता है और एक वर्ष में इसमें 1.25 फीसदी तक की कमी संभव है.
आवास, वाहन आदि के लिए ¬ण पर ब्याज दरों में कमी से लोगों की बचत और क्रय शक्ति में बढ़ोतरी होगी तथा बाजार में मांग बढ़ने से उत्पादन को बल मिलेगा. कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी और महंगाई के नियंत्रण में रहने से मुद्रास्फीति में सुधार के कारण रिजर्व बैंक ने यह राहत दी है. इस फैसले का बड़ा आधार यह भी है कि दिसंबर में बैंकों द्वारा दिये जानेवाले ¬ण की वृद्धि दर तीन महीने के सबसे कम स्तर 10.5 फीसदी तक आ गयी थी, जो पिछले वर्ष 14.5 फीसदी थी. इससे निपटने के लिए कई बैंक पहले ही ब्याज दर कम करने की घोषणा कर चुके थे.
अब रेपो रेट कम होने से बैंक 10 फीसदी से कम की दर पर आवास ¬ण देने की स्थिति में हैं. रिजर्व बैंक ने यह भी बताया है कि सितंबर, 2009 के बाद पहली बार मुद्रास्फीति की संभावना एकल अंक में है. हालांकि, इस कटौती (और संभावित कटौतियों) का लाभ तभी मिल सकेगा, जब सरकार वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध हो और आर्थिक घाटे को नियंत्रण में रखे. साथ ही, रुपये की कीमत में स्थिरता भी आवश्यक है. और, जैसा कि गवर्नर रघुराम राजन ने भी कहा है, आपूर्ति में बाधाओं को हटाना तथा उद्योग की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना जरूरी है.
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