आतंक के खिलाफ एकजुट होना होगा

स्वतंत्रता-समानता-भाईचारा के रूप में दुनिया को आधुनिक लोकतंत्र का सबक सिखानेवाला फ्रांस इस समय शोक में डूबा है. राष्ट्रपति ओलांदे ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा है कि मानवता के विकास की राह रोकने के लिए खड़ी किसी भी कट्टरता को जीतने नहीं दिया जायेगा. पेरिस की जिस धरती पर चार सौ साल […]
यह घटना आतंकवाद के उस बढ़ते खतरे को नये सिरे से रेखांकित करती है, जिससे आज पूरी दुनिया को जूझना पड़ रहा है. इसने दुनिया को फिर से आगाह किया है कि यदि कट्टरपंथी सोच पर लगाम नहीं लगाया गया, तो इसके दुष्परिणाम दुनिया के किसी कोने में दिल दहला सकते हैं.
तब शाबोनिएर ने कहा था कि ‘मैं कलम चला रहा हूं, हथियार नहीं’. यह साहसी कलम कट्टरपंथी हथियारों के आगे नहीं झुकी, लेकिन बर्बरता ने अब उसे तोड़ दिया है.
आज हर रोज दुनिया के किसी न किसी कोने में गरज रहीं आतंकी बंदूकें मानवता के विकास क्रम को मानो पूरी तरह पलट देना चाहती हैं, समाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देना चाहती हैं. वह चाहे बामियान की बुद्ध-प्रतिमा हो, लंदन का रेलवे स्टेशन, न्यूयार्क का वल्र्ड ट्रेड सेंटर, सिडनी का कैफे या फिर हिंदुस्तान का संसद-भवन, ये सब व्यक्ति की आजादी के ठिकाने ही तो हैं. इन पर चलती बंदूकें असल में मानवता के अब तक के विकास की कहानी पर एकबारगी लगाम लगाने को आतुर हैं. इस धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद से कई देशों में लोकतंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. इसलिए इन्हें तुरंत खामोश कराने के लिए विश्व को पहले कहीं ज्यादा ताकत और तत्परता के साथ सक्रिय होने की जरूरत है.
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