सिर से छत छिनने का डर नहीं होगा

Published at :03 Jan 2015 6:25 AM (IST)
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सिर से छत छिनने का डर नहीं होगा

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घोषणा की है कि राज्य की सभी बस्तियों को मालिकाना हक दिया जायेगा. यह लाखों लोगों से जुड़ा हुआ मामला है. इस बात की उम्मीद की जा रही थी कि जमशेदपुर में टाटा की जमीन पर बसी बस्तियों के लिए ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री कर सकते हैं, लेकिन पूरे राज्य के लोगों […]

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मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घोषणा की है कि राज्य की सभी बस्तियों को मालिकाना हक दिया जायेगा. यह लाखों लोगों से जुड़ा हुआ मामला है. इस बात की उम्मीद की जा रही थी कि जमशेदपुर में टाटा की जमीन पर बसी बस्तियों के लिए ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री कर सकते हैं, लेकिन पूरे राज्य के लोगों को वह यह तोहफा देंगे, यह उम्मीद नहीं थी.

अगर यह काम हो गया, तो राज्य के लाखों लोगों को इससे राहत मिलेगी. जिन दिनों रघुवर दास ने राजनीति आरंभ की थी, उनका बड़ा जनाधार इन बस्तियों से आता था. जमशेदपुर में बस्ती विकास समिति के वे संरक्षक हुआ करते थे. उन दिनों वहां 86 बस्तियां होती थीं, जो बढ़ती गयीं. यह वह जमीन है जो आरंभ में टाटा लीज में हुआ करती थी. सिर्फ जमशेदपुर में ही नहीं, बोकारो और रांची में बड़ी आबादी बस्तियों में रहती है. बोकारो स्टील प्लांट और एचइसी के लिए सरकार ने कभी जमीन का अधिग्रहण किया था.

जो जमीन खाली पड़ी थी, वहां लोग धीरे-धीरे बसते गये. कई बार उन्हें उजाड़ा गया, उनके घरों को तोड़ा गया क्योंकि सरकार उसे अवैध कब्जा मानती थी. इसी प्रकार राज्य में सीसीएल, बीसीसीएल समेत अनेक कंपनियों की जमीन पर लोग बस गये हैं. झारखंड सरकार ऐसी अवैध बस्तियों को वैध करने की पहल कर रही है. हाल ही में दिल्ली में यमुना पार की बस्तियों के बारे में भी ऐसा ही फैसला लिया गया है, इसलिए लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं. राजधानी रांची में कई ऐसी बस्तियां हैं जिन्हें हाइकोर्ट के आदेश पर हटाया गया था. लेकिन अब भी अनेक बस्तियां कायम हैं.

कई परिवार इनमें 40-50 सालों से रह रहे हैं. कागज पर जमीन कंपनी की है, लेकिन वास्तविक कब्जा इन लोगों का है. ऐसे में कंपनियां और सरकार जानती हैं कि इतनी बड़ी संख्या में आबादी को उजाड़ना संभव नहीं है. मुख्यमंत्री की घोषणा से लोगों में उम्मीद बंधी है कि अब बुलडोजर उनके घरों को नहीं तोडेगे, उनकी खुशी नहीं छीनेंगे. सरकार को इसके लिए कानून बनाना होगा. लेकिन घोषणा का दुष्प्रभाव यह हो सकता है कि जमीन माफिया सरकारी जमीन पर कब्जा करने लगें, ताकि बाद में उन्हें भी मालिकाना हक मिल जाये. इसलिए सरकार को सतर्क रहना होगा ताकि जो वास्तविक हकदार हैं, उसे ही लाभ मिले.

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