राजनीतिक दल लें गांवों की जिम्मेवारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Nov 2014 4:11 AM (IST)
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गांवों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है. विगत वर्षो में विकास की अवधारणा अनिवार्य रूप से शहरीकरण के प्रयासों पर ही केंद्रित रही है. इस कारण हमारे गांव शासन के लिहाज से उत्तरोत्तर हाशिये पर जाने के लिए अभिशप्त रहे हैं. उपेक्षा के कारण योजनाएं जमीनी हकीकत नहीं बन सकी हैं. […]
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गांवों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है. विगत वर्षो में विकास की अवधारणा अनिवार्य रूप से शहरीकरण के प्रयासों पर ही केंद्रित रही है. इस कारण हमारे गांव शासन के लिहाज से उत्तरोत्तर हाशिये पर जाने के लिए अभिशप्त रहे हैं. उपेक्षा के कारण योजनाएं जमीनी हकीकत नहीं बन सकी हैं.
इस असंतुलन को दूर करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसद आदर्श ग्राम योजना एक सराहनीय पहल है. इसके तहत सांसदों को अपने क्षेत्र के चुनींदा गांवों को विकास के मार्ग पर प्रशस्त करना है. बतौर सांसद नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र के गांव जयापुर को चुना है. गांव में दिये अपने भाषण में उनका इरादा स्पष्ट है कि अगर समाज कदम बढ़ाये और सरकार साथ दे, तो ग्रामीण भारत की तसवीर बदल सकती है. गांवों में जागरुकता और सरकार की संवेदनशीलता से समाज और सरकार के बीच खाई को पाटने की प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता सरकार के परंपरागत रुख में बड़े बदलाव का संकेत है.
इसमें कोई दो राय नहीं है कि समाज को अधिक चेतन और सक्रिय होना होगा, लेकिन इस योजना की सफलता बहुत हद तक स्वार्थी राजनीतिक-संस्कृति में सुधार पर निर्भर करती है और यह बात प्रधानमंत्री की हर एक पहल पर भी लागू होती है. इसलिए इस प्रयास में राजनीतिक दलों को अग्रणी भूमिका निभानी होगी. राजनीतिक दल यदि सांसद से लेकर स्थानीय कार्यकर्ता तक के अपने तंत्र को सक्रिय कर दें, तो देश का हर गांव आदर्श ग्राम में बन सकता है तथा राष्ट्रीय जीवन में सृजनात्मक भूमिका निभा सकता है.
यह जिम्मेवारी हर पार्टी की है, लेकिन सत्तारूढ़ होने के कारण भाजपा और उसके सहयोगी दलों को इस योजना में अपनी भागीदारी से उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए. आदर्श ग्राम योजना में सांसदों के अलावा विधायकों और अन्य जन-प्रतिनिधियों को भी आगे आकर अपने गांवों को बेहतर बनाने में जुटना चाहिए. लेकिन यह भी ध्यान रहे कि सारी कवायद स्वच्छता अभियान की तरह सस्ती लोकप्रियता हासिल करने तक सीमित न रह जाये, जैसा कि दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के एक कार्यक्रम में देखने को मिला, जहां पहले गंदगी फैलायी गयी और फिर हाथ में झाड़ू लेकर उसे साफ करने का नाटक किया गया.
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